
बिलासपुर,,,, राजकिशोर नगर निवासी 40 वर्षीय शालिनी कलसा ने अपने पूर्व पति संकल्प तिवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है! उनका कहना है! कि तिवारी ने उनकी ग्रेजुएशन की अंकसूची में फर्जीवाड़ा कर उसे खुद के नाम से इस्तेमाल किया और फार्मा कंपनी में एरिया मैनेजर की नौकरी हासिल कर ली! पीड़िता का दावा है! कि पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है!
पत्नी की अंकसूची में कूटरचना कर बनाया फर्जी दस्तावेज
शालिनी कलसा ने बताया कि उन्होंने बीएचएससी होम साइंस में स्नातक किया है! जिसकी अंकसूची गवर्नमेंट गर्ल्स डिग्री कॉलेज (GDC), गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से जारी हुई थी! पूर्व पति संकल्प तिवारी ने उसी अंकसूची में कॉलेज का नाम बदलकर “सीएमडी कॉलेज” और विषय को बदलकर “बीएससी कंप्यूटर साइंस” कर दिया!
उन्होंने दावा किया कि रोल नंबर, एनरोलमेंट नंबर और उत्तीर्ण वर्ष सबकुछ मूल जैसा ही रखा गया! लेकिन कॉपीराइट मोनो और अन्य सुरक्षा चिन्ह नकली दस्तावेज़ में मौजूद नहीं हैं! इससे स्पष्ट होता है! कि दस्तावेज़ की कूटरचना की गई है!
नकली दस्तावेज़ से पाई नौकरी, RTI से हुआ खुलासा
शालिनी के अनुसार संकल्प तिवारी ने इसी फर्जी अंकसूची का उपयोग कर फार्मा कंपनी में एरिया मैनेजर के पद पर नौकरी प्राप्त की! जब उन्हें इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो उन्होंने RTI के माध्यम से गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी, जिससे यह पूरा मामला उजागर हुआ!
पुलिस में दी गई शिकायत, अब तक कोई कार्यवाही नहीं
श्रीमती कलसा ने इस संबंध में 22 नवंबर 2024 को पुलिस अधीक्षक को आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। सिविल लाइन थाना द्वारा विश्वविद्यालय से दस्तावेजों का सत्यापन भी कराया गया था, जिसमें कूटरचना की पुष्टि हुई है, इसके बावजूद आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई।
नई फर्जी अंकसूची तैयार करने का भी आरोप, धमकी देने का दावा
शालिनी कलसा का आरोप है कि संकल्प तिवारी ने अब “मैथ्स यूनिवर्सिटी, रायपुर” के नाम से एक और नई फर्जी अंकसूची तैयार कर नौकरी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमकियां दी जा रही हैं, लेकिन प्रशासन कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहा है।
एफआईआर और दस्तावेज़ जप्त की मांग
पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से दोबारा मुलाकात कर एफआईआर दर्ज करने, संकल्प तिवारी की 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन की सभी अंकसूचियों को जब्त करने और आगे कानूनी कार्यवाही की मांग की है!
एसपी ने सिविल लाइन थाना को जांच के निर्देश दिए है!
यह मामला न केवल दस्तावेज़ों की कूटरचना का है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि आखिर कैसे फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे कोई व्यक्ति वर्षों तक नौकरी करता रहा और पुलिस-प्रशासन की निष्क्रियता के चलते पीड़िता को न्याय नहीं मिल रहा।
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