
बिलासपुर,,, गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने और गौसेवा से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर मस्तूरी हनुमान मंदिर से बिलासपुर कलेक्ट्रेट तक तीन दिवसीय दंडवत पदयात्रा का आयोजन किया गया। यह पदयात्रा 2 जून से 4 जून तक चलेगी जिसमें गौसेवकों ने 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा!
इस ऐतिहासिक और जनजागरण यात्रा का नेतृत्व ओमेश बीसेंन और विपुल शर्मा के नेतृत्व में किया गया! यात्रा का मुख्य उद्देश्य गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करना, गौवंश बाजार बंद कराना, गौतस्करी रोकना, बिलासपुर गौ सेवा धाम को ज़मीन दिलाना और वेटनरी सेवाओं में सुधार लाना रहा!
प्रमुख 11 सूत्रीय मांगे:
- गौ माता को राज्यमाता घोषित किया जाए और इसे राष्ट्रमाता के रूप में मान्यता देने हेतु प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाए।
- कुटी घाट, रतनपुर, तख़तपुर के मवेशी बाजार बंद किए जाएं।
- बिलासपुर गौ सेवा धाम को, जो 23 वर्षों से सेवा में संलग्न है, स्थायी भूमि दी जाए।
- डॉ. राम ओतलवार को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया जाए और 24 घंटे वेटनरी हॉस्पिटल खुला रहे।
- कृत्रिम गर्भाधान केंद्र को बंद किया जाए।
- सभी गौवंश बाजारों को राज्यभर में पूरी तरह बंद किया जाए।
- गौ आधारित कृषि को बढ़ावा देने वालों को ही सब्सिडी व लाभ मिले।
- जर्सी, एचएफ और विदेशी नस्लों* के पालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
- गौ तस्करों पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें कठोर दंड दिया जाए व उनके बैंक खातों की जांच हो।
- गौ मंत्रालय का गठन हो व मंडी बोर्ड को गौ सेवा आयोग से हटाकर राज्य सरकार के अधीन लाया जाए।
- वेटनरी एम्बुलेंस व 24 घंटे सेवाओं के लिए राज्य स्तरीय पशु चिकित्सालय** की स्थापना की जाए।
📜 ज्ञापन सौंपा गया:
यात्रा के समापन पर बिलासपुर कलेक्टर महोदय को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया, वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी आवेदन पत्र दिया गया। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जब तक सभी 11 सूत्रीय मांगें पूरी नहीं होती, पूरे छत्तीसगढ़ में इसी तरह की जन-जागरण दंडवत यात्राएं की जाएंगी।
🙏 भाग लेने वाले प्रमुख गौसेवक:
ओमेश बीसेंन, विपुल शर्मा, बाबा शर्मा (गौ रक्षा प्रमुख), गोपाल कृष्ण रामानुज दास, शुभम् शुक्ला, शत्रुघन यादव, मंजीत सिंह, आशीष त्रिपाठी, विष्णु दुबे, प्रकाश पुरोहित, नन्हे सिंह चंदेल, सिद्धांत शर्मा, भूपेंद्र कौशिक, आचार्य सचिन, नीरज पटेल, आशीष यादव समेत 100+ गौभक्तों ने भाग लिया।
गौ माता सिर्फ पशु नहीं, राष्ट्र की आत्मा हैं” – गौ सेवकों का संकल्प
गौ सेवकों का कहना है कि गौ रक्षा और सेवा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, कृषि और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व है। यदि शासन ने मांगें नहीं मानीं, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।
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