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30 Jan 2026, Fri

मोपका राशन दुकान में गड़बड़ घोटाला,  डीलर ने गरीबो के हक के चावल, शक्कर और नमक गबन का आरोप, उपभोक्ता बोले 3-4 महीने से राशन नहीं, ड्यू एंड डियर कहकर चल रहा खुला भ्रष्टाचार…

बिलासपुर,,, जिले  में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पोल खोलने वाली एक गंभीर और संवेदनशील खबर सामने आई है! जो गरीबों के हक पर हो रहे खुल्लमखुल्ला डाके की कहानी बयां करती है! “गरीबों के चावल में डाका” लगाने वालों को सख़्त सज़ा देने की बात करने वाले नेताओं के वादों के बावजूद, ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है!

बिलासपुर में पीडीएस सिस्टम बना सिंडिकेट, गरीबों के राशन पर डाका

क्या है मामला?

बिलासपुर के मोपका वार्ड नम्बर 47 की उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण में भारी गड़बड़ी सामने आई है! उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है! कि उनके राशन कार्ड में 3-4 महीने का बकाया (Due) दिखाकर सील लगा दी जा रही है! लेकिन ना तो नमक, ना शक्कर और ना ही चावल दिया जा रहा!

मीडिया की जांच में हुआ खुलासा

मीडिया की टीम को उपभोक्ताओं से मिली शिकायत के बाद सोमवार को दुकान में निरीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए!!!

  • राशन कार्ड जमा कराने के बाद 20 कार्डधारियों को ही राशन देने की बात कही जा रही थी। बाकियों को लौटा दिया गया!
  • राशन दुकान में कोई कर्मचारी तौल करने वाला मौजूद नहीं था! उपभोक्ताओं को मजबूरी में खुद ही चावल अपनी बोरियों में भरना पड़ा!
  • शक्कर और नमक जैसी आवश्यक वस्तुएं कई महीनों से वितरित नहीं की जा रही!

उपभोक्ताओं का दर्द

दिनेश कुमार (राशन कार्डधारी): तीन महीने से राशन नहीं मिला कहते हैं! रिकॉर्ड में ड्यू है! लेकिन राशन नहीं दिया जा रहा!

सुभाष कश्यप (उपभोक्ता): जो चावल हमें मिलना चाहिए था! वो प्लांट भेजा जा रहा है! वहां इसका छिलाई कर महंगे दाम पर बेचा जाता है!

पैसे ले लो, चावल छोड़ दो’ – नया फार्मूला

उपभोक्ताओं ने खुलासा किया कि अधिकांश दुकानों में यह घोटाला एक तय फार्मूले पर चल रहा है!

  • गरीबों को उनका चावल नहीं दिया जाता
  • इसके बदले कहा जाता है! ‘चावल छोड़ दो, पैसे ले लो’
  • यह चावल थोक में प्लांट भेजा जाता है! वहाँ से उसे बाजार में महंगे दाम पर बेचा जाता है!

सवा 54 लाख का राशन घोटाला पहले ही उजागर

इससे पहले भी बिलासपुर में सवा 54 लाख रुपए के राशन घोटाले का मामला सामने आया था!  जिसमें राजनीतिक संरक्षण की भी आशंका जताई गई थी! अब मोपका का मामला बताता है!  कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि संगठित सिंडिकेट की तरह चल रही एक बड़ी योजना है!

सरकार और प्रशासन से सवाल

  • गरीबों के नाम पर आने वाला अनाज कहाँ जा रहा है?
  • क्या उचित मूल्य की दुकानें अब दलालों और व्यापारियों के हाथों की कठपुतली बन चुकी हैं?
  • जिन नेताओं ने मंच से कहा था! गरीबों के चावल में डाका डालने वालों को जेल भेजा जाएगा”अब वे कहाँ हैं?

जरूरत है! सख्त कार्यवाही की

यह केवल एक घोटाला नहीं, बल्कि गरीबों की भूख पर व्यापार है! अगर अब भी प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं, तो हालात और भी भयावह हो सकते हैं!!!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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