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28 Jan 2026, Wed

पाताल ने निगला तालाब घानाकछार में जलसमाधि ने मचाई सनसनी, गांव में दैवी चमत्कार की चर्चा, प्रशासन चकराया, विज्ञान बोले जांच जरूरी, आस्था बोले पूजा जरूरी…

बिलासपुर,,, तखतपुर कोटा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम घानाकछार में प्रकृति ने ऐसा रहस्य रच दिया है! जो आज तक न तो किसी ने न देखा, न सुना! गांव के 45 वर्ष पुराने तालाब में अचानक एक विशाल गड्ढा बन गया और देखते ही देखते लगभग 4 एकड़ में फैला तालाब का 85 प्रतिशत पानी उस गड्ढे में समा गया! अब स्थिति ये है! कि तालाब लगभग पूरी तरह से खाली हो चुका है! और पानी सीधे पाताल लोक में जाने की बात कही जा रही है! क्योंकि आसपास कहीं भी जल रिसाव के कोई संकेत नहीं मिले हैं!!!

प्राकृतिक घटना या दैवीय संकेत…?

घटना 14 जुलाई, सोमवार को सामने आई, जब तालाब में लबालब पानी से भरा हुआ था! ग्रामवासियों को जब यह महसूस हुआ कि पानी बहुत तेज़ी से कम हो रहा है! तब तालाब की दाहिनी ओर एक विशाल गड्ढा नजर आया! जिसमें पानी तेजी से समाता जा रहा था! यह दृश्य देख ग्रामीण आश्चर्यचकित रह गए! गांव के राजेंद्र साहू ने सबसे पहले इस असामान्य गतिविधि को देखा और तत्काल सरपंच साधराम चेचाम सहित कई ग्रामीणों को सूचना दी!!!

गांव के कार्तिकराम, छोटे लाल साहू, भागवत, राम, जय राम, संदीप यादव, मोहन लाल, तुलसीराम, सियाराम, डॉ. संतोष साहू ने जब मौके पर पहुंचकर गड्ढा देखा, तो उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ!

निस्तारी संकट की दस्तक

तालाब हमेशा से गांव की निस्तारी जरूरतों का प्रमुख स्रोत रहा है! जहां ग्रामीण दैनिक नित्यकर्म से लेकर पशुओं को पानी पिलाने तक के कार्य करते रहे हैं! अब जब तालाब लगभग सूख चुका है! तो गांव पर जल संकट गहराने लगा है! यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो सैकड़ों ग्रामीणों को भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ सकता है!!!

“ऐसी घटना कभी नहीं देखी” – सरपंच

गांव के सरपंच साधराम चेचाम ने बताया, “यह 45 साल पुराना तालाब है! और आज तक कभी ऐसा कुछ नहीं देखा! यह घटना पहली बार हुई है! कि पूरा तालाब अचानक खाली हो गया! हमने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी है! और जांच की प्रतीक्षा कर रहे हैं!

चमत्कार में बदल गई घटना

जहां वैज्ञानिक और भूवैज्ञानिक इस घटना की प्राकृतिक व्याख्या तलाशने में जुट सकते हैं! तो वहीं स्थानीय ग्रामीण इसे दैवीय चमत्कार मान रहे हैं! जिस गड्ढे में पानी समा रहा है! उसे पाताल लोक का द्वार मानते हुए कई ग्रामीण वहां पूजा-अर्चना करने पहुंच रहे हैं! अब यह स्थान आस्था का केंद्र बनता जा रहा है! और दूर-दराज़ से लोग इस “चमत्कारी घटना” को देखने के लिए पहुंच रहे हैं!!!

प्रशासन की जांच जरूरी

यह घटना केवल धार्मिक या स्थानीय महत्व की नहीं है! बल्कि भूगर्भीय दृष्टिकोण से भी गंभीर है! प्रशासन और वैज्ञानिकों को चाहिए कि वे इस प्राकृतिक रहस्य की तथ्यात्मक जांच करें, जिससे इस प्रकार की आकस्मिक घटनाओं से भविष्य में जनहानि या अन्य नुकसान न हो!!!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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