
बिलासपुर ,,,, वर्दी वाला गुंडा जी हाँ! यह शब्द आपने किताबों में पढ़ा होगा या कहानियों में सुना होगा! लेकिन आज यह शब्द हमारे समाज की हकीकत बनकर सामने आया है!

मामला बिलासपुर जिले का है! जहां कानून के रखवाले ही कानून तोड़ते नज़र आए! सीपत थाने के वर्दीधारी पुलिसकर्मी खुलेआम गुंडागर्दी करते दिखे!
यह पूरा घटनाक्रम पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर का है! यहां एक पीड़ित युवक अपनी समस्या लेकर पुलिस अधीक्षक से मिलने पहुंचा था! लेकिन उससे मिलने देना तो दूर, पुलिस वालों ने उसके साथ ऐसा बर्ताव किया मानो वह कोई बड़ा अपराधी हो!
विडियो में साफ दिख रहा है! कि वर्दीधारी पुलिस वाले युवक को जमीन पर घसीटते हुए खींचकर ले जा रहे हैं! यह नजारा देखकर किसी का भी खून खौल उठे!
जनता की सुरक्षा का वचन लेने वाले पुलिसकर्मी जब पीड़ित को ही इस तरह पीट-पीटकर, घसीट-घसीटकर उठाएं तो सोचिए इंसाफ की उम्मीद किससे की जाए…?
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है! कि युवक केवल अपनी शिकायत लेकर आया था! लेकिन सरेआम गुंडागर्दी करते हुए पुलिसवालों ने उसे कार्यालय से बाहर निकाला और जबरदस्ती सरकारी वाहन में ठूंस दिया! पूछे जाने पर घटना की वजह यह बताई गई! कि युवक सीपत थाने के खिलाफ शिकायत करने आया था!
यानी सच्चाई उजागर करने की कोशिश करना ही उसके लिए अपराध बन गया! पीड़ित के परिजनों ने आरोप लगाते हुवे बताया कि थाना सीपत के पुलिसकर्मी और थानेदार मिलकर उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं! नारायण प्रसाद की बेटी ने कहा कि पुलिसकर्मी सहेत्तर कुर्रे पर विशेष तौर पर जमानत मिलने के बाद भी उन्हें प्रताड़ित करने और लगातार धमकाने का आरोप है! परिवार ने यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनसे ₹25,000 की रिश्वत की मांग की! बेटी का कहना है! कि पुलिस वाले घर में घुसकर गाली-गलौज करते हैं! और दबाव बनाते हैं! अगर पैसा नहीं दिया गया! तो और फर्जी केस दर्ज करने की धमकी दी जाती है!नारायण प्रसाद के परिजनों ने बताया कि उनका परिवार पिछले कई दिनों से भय और असुरक्षा में जी रहा है! उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें न्याय चाहिए और उनके साथ हो रही पुलिसिया ज्यादतियों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए! उन्होंने मांग की कि पूरे परिवार को सुरक्षा दी जाए, ताकि वे सुरक्षित रह सकें और न्याय की लड़ाई लड़ सकें!
अब सवाल यह है! कि जब पुलिस का पहरेदार ही गुंडा बन जाए तो आम जनता कहाँ जाए…? कानून के रखवालों की वर्दी अगर अत्याचार का प्रतीक बनने लगे, तो जनता का भरोसा किस पर टिकेगा…? पुलिस अधीक्षक कार्यालय जैसे बड़े दफ्तर में, खुलेआम गुंडागर्दी की ये तस्वीरें पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं! यह कोई छोटी बात नहीं है! लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी समस्या बताने, अपनी बात रखने का अधिकार है! लेकिन जब उसी अधिकार को वर्दी की ताकत से कुचल दिया जाए तो यह केवल गुंडागर्दी नहीं बल्कि लोकतंत्र की हत्या है! यह घटना पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान छोड़ रही है! क्या बिलासपुर की पुलिस अब न्याय नहीं, बल्कि ज़बरदस्ती और दहशत फैलाने का औज़ार बन चुकी है? पीड़ित की आवाज़ दबाने के लिए पुलिस का यह तरीका केवल शर्मनाक ही नहीं, बल्कि खतरनाक है!!!
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