
बिलासपुर,,,, बिलासपुर जिले के प्रतिष्ठित व्यवसायी दशरथ लाल खंडेलवाल की नृशंस हत्या के 12 साल बाद न्याय की लौ फिर से जली है! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालत के दोषमुक्ति आदेश को रद्द करते हुए दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है! इस फैसले के पीछे खड़ा है! एक बेटे का वो अटूट संकल्प, जिसने अपने पिता के कातिलों को सजा दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः न्याय की जीत सुनिश्चित की…!

22 नवंबर 2013 की दोपहर बिलासपुर का वह दिन आज भी खंडेलवाल परिवार की रूह में काँपता है! जब उसलापुर स्थित 36 मॉल के पास रहने वाले दशरथ लाल खंडेलवाल के घर दो नकाबपोश युवक दरवाजे पर घंटी बजाकर घुसे और महज़ पैसों के लिए खून की होली खेल डाली! उन्होंने चाकू की नोंक पर लूट का प्रयास किया, विरोध करने पर दशरथ खंडेलवाल पर ताबड़तोड़ चाकू से वार कर दिया गया!उनकी पत्नी विमला देवी जब बचाने आईं, तो उन्हें भी पेट में चाकू मार दिया गया! विमला देवी को गंभीर हालत में ICU में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की कोशिश से उनकी जान बची… लेकिन दशरथ खंडेलवाल की अस्पताल में ही मौत हो गई! यह वह लम्हा था! जब एक परिवार उजड़ गया, एक बेटा अनाथ हो गया और एक पत्नी जीवन और मृत्यु के बीच झूलने लगी…!
अनिल खंडेलवाल (स्व दशरथ लाल खंडेलवाल के पुत्र)
हत्या के कुछ ही दिनों बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों विक्की उर्फ मनोहर सिंह और विजय चौधरी को गिरफ्तार किया! उनके पास से मृतक की घड़ी और मोबाइल फोन बरामद भी हुए! बावजूद इसके, 2016 में तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया! यह फैसला उस बेटे अनिल खंडेलवाल के लिए एक और सदमा था! जिसने अपने घायल माँ को ICU से बाहर आते देखा और अपने पिता को अंतिम बार अस्पताल की चादर में लिपटा देखा था! लेकिन उसने हार नहीं मानी! उसने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया और अंततः न्यायपालिका ने निचली अदालत के फैसले को “विकृत व अनुमानों पर आधारित” करार देते हुए पलट दिया! हाईकोर्ट ने कहा, “घायल गवाह की गवाही मामूली विरोधाभास के चलते खारिज नहीं की जा सकती जब अन्य साक्ष्य उसकी पुष्टि करता हो और फिर वही हुआ — दोनों आरोपियों को धारा 302/34 में आजीवन कठोर कारावास और धारा 307/34 में 10 वर्षों की सजा सुनाई गई…!
यह सिर्फ एक अदालती फैसला नहीं, एक बेटे की हिम्मत, एक पत्नी की गवाही और न्यायपालिका की संवेदनशीलता की मिसाल है! यह कहानी बताती है! कि न्याय भले देर से मिले, लेकिन जब मिलता है! तो वह उम्मीद, साहस और विश्वास को फिर से जीवित कर देता है!न्याय जिंदा है! और जब कोई हार नहीं मानता — तो इंसाफ ज़रूर बोलता है…!
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