
00 ठेकेदारी को लेकर नेताओ में खींचतान, 6 माह में नही हो पाया टेंडर…
00 सभापति के तेवर और मीडिया में आ रही खबरों से मचा खदबर्रों, अफसर खंगालवा रहे हिसाब-किताब…
बिलासपुर,,,, मच्छरो के बढ़ते तादात, ठप फॉगिंग मशीनें, इसके नाम पर चल रहे डीजल-पेट्रोल व ठेकेदारी के खेल, इसको लेकर आई सभापति की तल्ख टिप्पणी से हो रही फजीहत से निगम में खलबली मच गई है! सभापति के बिफरे तेवर से घबराए जोन कमिश्नरों व प्रभारी ने इसका रिकॉर्ड और लेखा जोखा खंगालना शुरू कर दिया है!
फॉगिंग के नाम पर हो रहे करोड़ो के खेल ने नेताओ की नींद उड़ा दी.. यही वजह है! कि इसे भी ठेके पर देने स्क्रिप्ट तय की गई… कुछ पार्षदो ने गुट बनाकर अपने करीबी ठेकेदारों को टेंडर दिलाने इस कदर घमासान मचा रखा है! कि छह माह से टेंडर ही नही हो पा रहा…
मच्छर खुद मर जाएंगे अपना खर्चा सुनकर...
निगम के सूत्रों की माने तो सभी 8 जोन में दो- दो यानि कुल 16 और सेंट्रल जोन से 7 फॉगिंग मशीनों को निगम के आदर्श पेट्रोल पंप से डीजल- पेट्रोल दिया जा रहा है! प्रत्येक फॉगिंग मशीन के लिए 12 लीटर डीजल और 5 लीटर पेट्रोल का कोटा तय है! यानि एक मशीन को एक दिन चलाने में मोटा मोटा 1700 रुपये का खर्चा है! तो 23 मशीनें है! 1700*23= 39 हजार 100 रुपये रोज का खर्चा है! 1 दिन का खर्चा 39 हजार 100 रुपए तो एक माह का होगा… 11 लाख 73,000 रुपये, एक माह में 11 लाख 73 हजार रुपये तो 12 माह में = 1 करोड़ 40 लाख 76000 रुपये ये तो हुआ निगम का मच्छर मारने का खर्चा, अब शहर को ही ले लीजिए हर घर मे मच्छर अगरबत्ती, क्वाइल और अन्य मच्छररोधी यंत्र जल-चल रहे इसका खर्चा भी जोड़ लीजिये तो मच्छरों को भी शर्म आ जायेगा कि उस पर इतना खर्चा…?
और 10 करोड़ महीना भी…
शहर की सफाई व्यवस्था का दिल्ली तक डंका बज रहा, पर यहां पब्लिक, जनप्रतिनिधि कोई संतुष्ट नही! दिल्ली की लायन्स सर्विसेज कम्पनी को सड़कों को धूल मुक्त करने, सड़क की सफाई, डिवाइडरों और फुटपाथ की सफाई और धुलाई का, तो दिल्ली की एमएसडब्ल्यू सॉल्यूशन फर्म को डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, शहरी कचरे का संकलन, उठाव और कछार के कचरा प्लांट पहुँचा कर कचरे के सम्पूर्ण निदान करने, वही सभी 8 जोन में नाले नालियों की सफाई के लिए नेताओ के भाई भतीजे या करीबी लेबर सप्लायर समेत सभी को मिलाकर को लगभग 9 से 10 लाख रुपये मासिक भुगतान किया जा रहा फिर भी शहर गन्दा का गन्दा, क्योकि यदि इतनी सफाई है! सब चकाचक है! तो फिर मुख्यमार्गों से लेकर गलियों और घरों- घर इतना मच्छर है क्यो…?
फॉगिंग सिर्फ वीआईपी बंगलो में…
अफसरों को मतलब नही है! जनता जनार्दन ने जिन जनप्रतिनिधियों को विकास और जनसमस्या के निदान के लिए चूना है! वे ठेकेदारी और चेम्बर के चक्कर मे उलझे है! चुनाव के बाद मच्छर उनके जनता जनार्दन का खून पी रहे, कोई देखने वाला नही, डर सिर्फ वीआईपी से है! तो वे तो प्राथमिकता में है! उनके बंगलो में नियमित फॉगिंग कराई जा रही है,,, मामला है! कुल मिलाकर…पब्लिक जाए साले भाड़ मा टाइप का है…?
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