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22 Jan 2026, Thu

“निगम में ठेकेदारों की धमक! करोड़ों का पारिश्रमिक अटका, महीनों से मजदूर बेहाल अफसर कहते बिल पास, श्रमिक पूछें पैसा कहाँ…? 13 को बड़ी बैठक, उम्मीद बस आस की…

बिलासपुर,,,, न्यायधानी के निगर निगम में करोड़ों के पारिश्रमिक और एडवांस घोटाले से गला छुड़ाने वाले मजबूत ठेकेदार
डंडा करने वाले उपायुक्त को निबटाने के बाद फिर पॉवर में आ गए!तभी तो ठेका श्रमिको को तीन-तीन, चार- चार माह से भुगतान नही किया जा रहा… निगम आयुक्त कह रहे कि वे हर माह बिल पास कर रहे तो फिर ठेकेदारी में छेद कहा हो गया… क्योकि दावा तो डिजिटल इंडिया और सीधे श्रमिको के खाते में मेहनताना अन्तरित करने का है…? तो फिर इन श्रमिको के पैसे को कौन ब्याज पर चला रहा या अपना खर्चा चला रहा…? किसी को मकान के किराए का टेंशन है! तो किसी को घर के राशन का तो किसी को बच्चों के स्कूल के बकाया फीस का दिवाली के बाद मेहनताना मिल नही रहा किसी का तीन तो किसी के चार माह का बकाया है!
निगम के ठेका श्रमिक रोज एक दूसरे से पूछ रहे मोबाइल चेक कर रहे कि कही ठेकेदार ने मेहनताना तो नही डाल दिया… बस इसी आस में डंटे है,,,, एक तो तीन चार माह के पारिश्रमिक बाकी का सवाल है! आज नही तो कल मिलेगा… भले एक माह का मिले और दूसरा उम्र कट गई अब जाए तो जाएंगे कहा, कुल मिलाकर जब तक सांस है तब तक आस है जैसी स्थिति है!
न्यूज बास्केट ने निगम के ठेकेदार अजय ताम्रकार को कॉल कर जानने का प्रयास किया की आखिर दिक्कत कहा आ रही क्यो  हाड़तोड़ मेहनत करने वाले श्रमिको को उनके हक अधिकार का पैसा उनका मेहनताना उन्हें देने मिलने में दिक्कत आ रही लेकिन उन्होंने मोबाइल ही रिसीव नही किया!
हा ये सही है! कर्मचारियों ने इस आशय का पत्र दिया है ये गलत है मानव अधिकार का हनन है। ठेका श्रमिको को हर माह मेहनताने का पैसा मिलना चाहिए 13 को इन्ही विषयो को लेकर सन्गठन की बैठक बुलाई गई है, जिसमे निर्णय लिया जाएगा कि आगे करना क्या है।

नन्द कुमार कुशवाहा
अध्यक्ष स्वायत्त शासी कर्मचारी संघ, नगर निगम बिलासपुर

संगठन ने कई बार इस मुद्दे को लेकर नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री और उच्च अफसरों के समक्ष बात रखी। नगरीय प्रशासन विभाग ने आदेश भी जारी किया कि नियमित कर्मचारियों को हर माह के  5 तारीख  और ठेका, टॉस्क, दैनिक कर्मसहरियो को हर माह की  7 ता तक वेतन और पारिश्रमिक का भुगतान करे,  बकायदा आदेश है इसके बाद भी  ये हाल 13 दिसम्बर को बैटक कर निर्णय लेंगे। स्वछता दीदियों का भी पारिश्रमिक नही दिया जा रहा।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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