
बिलासपुर,,, सोशल मीडिया पर नारायणा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स को लेकर चल रही खबरों को स्कूल प्रशासन ने पूरी तरह भ्रामक और गलत बताया है! स्कूल के प्राचार्य प्रभात चंद्र झा ने साफ किया है! कि संस्थान पूरी तरह से सरकारी नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन कर रहा है! राहत की बात यह है! कि इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (D.E.O) ने भी जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है! इस सरकारी जांच रिपोर्ट में स्कूल को क्लीन चिट मिल गई है! और यह पुष्टि हुई है! कि स्कूल ने शिक्षा विभाग के सभी नियमों का कड़ाई से पालन किया है!
हाल ही में कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर स्कूल की मान्यता और परीक्षाओं को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही थीं! इन भ्रामक खबरों पर रोक लगाने और अभिभावकों के सामने सही तथ्य रखने के लिए स्कूल प्रबंधन ने आधिकारिक तौर पर अपना पक्ष रखा है! प्राचार्य झा ने बताया कि नारायणा ग्रुप पिछले 47 सालों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है! कोई भी संस्थान इतने लंबे समय तक बिना सही नियमों और राष्ट्रीय मानकों के काम नहीं कर सकता है
कानूनी पक्ष: 8वीं तक के लिए बोर्ड की जरूरत नहीं…
मान्यता को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर स्कूल ने कानूनी और नियम कायदों की स्थिति साफ की है! प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक, किसी भी स्कूल को कक्षा 8 तक चलाने के लिए ‘बोर्ड’ (जैसे CBSE या राज्य बोर्ड) की मान्यता की जरूरत नहीं होती है! 8वीं तक का संचालन सीधे राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों के तहत आता है! और स्कूल के पास इसकी पूरी अनुमति है! बोर्ड की मान्यता कक्षा 9 से आगे की पढ़ाई के लिए जरूरी होती है! इस मामले में भी स्कूल पूरी तरह से नियमों के साथ चल रहा है! आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए CBSE ने स्कूल को कक्षा 9 में एडमिशन देने की आधिकारिक अनुमति दे दी है! इसलिए मान्यता न होने के जो भी दावे किए जा रहे हैं! वे कानूनी तौर पर पूरी तरह बेबुनियाद हैं!
5वीं और 8वीं की परीक्षा पर भी स्कूल का जवाब...
एक और विवाद 5वीं और 8वीं की परीक्षाओं को लेकर था! इस पर स्कूल ने साफ किया है! कि कक्षा 5 और 8 में कोई ‘बोर्ड परीक्षा’ नहीं होती है! यह केवल राज्य शिक्षा विभाग की तरफ से आयोजित होने वाली एक सेंट्रलाइज्ड (केंद्रीकृत) परीक्षा है! स्कूल में जो भी परीक्षाएं करवाई गई हैं! वे पूरी तरह से शासन और न्यायालय (कोर्ट) के निर्देशों के आधार पर ही हुई हैं! इसमें कोई भी नियम नहीं तोड़ा गया है!
पैरेंट्स की सहमति और पूरी पारदर्शिता…
स्कूल प्रबंधन का कहना है! कि उन्होंने किसी भी प्रक्रिया को अभिभावकों से छिपाया नहीं है! सभी पैरेंट्स को समय रहते पूरी जानकारी दी गई थी! उनकी लिखित सहमति मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी की गई… बिना पैरेंट्स को भरोसे में लिए स्कूल ने कोई कदम नहीं उठाया है!
पारदर्शिता के सवाल पर स्कूल ने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है! स्कूल का UDISE (यू-डाइस) कोड, राज्य शासन से मिली मान्यता का नंबर और CBSE के एफिलिएशन (संबद्धता) की पूरी डिटेल सरकारी पोर्टल्स पर लाइव है! कोई भी अभिभावक या आम आदमी इंटरनेट पर जाकर सरकारी वेबसाइट्स पर इन जानकारियों को खुद वेरिफाई (सत्यापित) कर सकता है!
अंत में प्राचार्य प्रभात चंद्र झा ने मीडिया और अभिभावकों से अपील की है! कि वे सोशल मीडिया पर चल रही आधी-अधूरी जानकारी पर तुरंत भरोसा न करें… बच्चों का भविष्य अहम है! इसलिए किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले सीधे स्कूल से या सरकारी वेबसाइट से तथ्यों की जांच जरूर करें और भ्रामक खबरों से बचें…!
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