Sun. Oct 18th, 2026

खाकी का ‘खेल’: ASI दिनेश तिवारी ने डकैती को बनाया साधारण लूट, केस डायरी से खेलकर आरोपियों को दिलाया बचाव, जांच में खुली साजिश की परतें, अब पुराने मामलों की फाइलें खुलते ही बढ़ेंगी मुश्किलें…

बिलासपुर,,,  पुलिस विभाग में उस समय हड़कंप मच गया… जब निलंबित A.S.I दिनेश तिवारी के खिलाफ एक और गंभीर मामला उजागर हुआ… रतनपुर थाने में पदस्थ रहते हुए तिवारी पर आरोप है! कि उन्होंने एक संगीन डकैती के मामले को जानबूझकर साधारण लूट में बदल दिया… जिससे आरोपियों को कड़ी सजा से बचाया जा सके…
यह पूरा मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी बिलासपुर के केस नंबर 648/2021 से जुड़ा है! जिसमें दीपक सिंह सहित अन्य आरोपियों पर धारा 394, 341 और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था…! घटना के दौरान आरोपियों द्वारा लाठी और चाकू जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया था…! जिससे यह मामला गंभीर श्रेणी में आता था…!


डकैती को ‘लूट’ में बदला...


कानूनी जानकारों और आईजी द्वारा गठित समीक्षा समिति के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला धारा 397 (घातक हथियार के साथ डकैती) के अंतर्गत दर्ज होना चाहिए था…!

इस धारा के तहत मामला सत्र न्यायालय में चलता है! जहाँ आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है! लेकिन विवेचक A.S.I दिनेश तिवारी ने इसे साधारण लूट का मामला बनाकर मजिस्ट्रेट न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया… जहाँ अधिकतम तीन वर्ष की सजा का ही प्रावधान है!


आरोपियों को बचाने की ‘रणनीति…


जांच में यह भी सामने आया कि A.S.I तिवारी ने आरोपियों को फायदा पहुंचाने के लिए दो अहम स्तरों पर काम किया… पहला, उन्होंने जानबूझकर आरोपियों की शिनाख्त परेड नहीं कराई…

जिससे अदालत में पहचान साबित नहीं हो सकी… दूसरा, गंभीर धाराओं को हटाकर हल्की धाराएं लगाई गईं… ताकि सजा की अवधि सीमित हो जाए…


अधूरी विवेचना का असर…


विवेचना में छोड़ी गई इन खामियों का सीधा फायदा आरोपियों को मिला और वर्ष 2025 में अदालत ने दीपक सिंह व अन्य को दोषमुक्त कर दिया… समीक्षा समिति की रिपोर्ट में इसे महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश करार दिया गया है!


पुराने मामलों की खुलेंगी फाइलें…


इस खुलासे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप है! S.S.P के निर्देश पर दिनेश तिवारी द्वारा देखे गए पुराने सभी मामलों की फाइलें दोबारा खंगाली जा रही हैं! आशंका जताई जा रही है! कि ऐसे कई और मामलों में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आ सकती हैं!


न्याय व्यवस्था पर सवाल...


यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है! जब विवेचना अधिकारी ही आरोपियों को बचाने के लिए केस कमजोर करें… तो पीड़ितों को न्याय मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है!
फिलहाल मामले की विस्तृत जांच पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जारी है! और आने वाले दिनों में इस प्रकरण में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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