बिलासपुर,,, कहते हैं कि जब सिस्टम सो जाता है! तो भ्रष्टाचार सिंडिकेट बन जाता है। बिलासपुर में भी कुछ ऐसा ही हुआ। सांप काटने से मौत के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये निकाल लिए गए, फर्जी दस्तावेज बनते रहे, मुआवजे बंटते रहे और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। लेकिन विधानसभा में एक युवा विधायक ने ऐसा सवाल उठाया कि पूरे सिस्टम की नींद उड़ गई। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला की लगातार आक्रामकता का ही नतीजा है कि अब सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े में FIR दर्ज हो रही है और कई चेहरों से पर्दा उठना शुरू हो गया है। इस पूरे मामले को विधानसभा में उठाने वाले बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला का दावा है कि यह सिर्फ कुछ लोगों की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा एक पूरा सिंडिकेट है। इतना ही नहीं, अब विधायक ने प्रदेश में “लू घोटाले” की आशंका भी जता दी है।
छत्तीसगढ़ में जशपुर जिले को नागलोक के नाम से जानते हैं, लेकिन मुआवजा वितरण के मामले में बिलासपुर नंबर वन पर है। यहां 431 लोगों की मौत सांप काटने के कारण हुई है और 17 करोड़ रुपए का मुआवजा अलग-अलग सालों में बांटा गया है।
यह मुद्दा बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने मार्च 2025 में उठाया था जिसके बाद मामले में मुख्यमंत्री ने भी नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की जांच जल्द करने के निर्देश जारी किए थे जारी है और हैरानी यह है की जांच रिपोर्ट भी अलग-अलग तरह से सामने आ रही थी। विधानसभा में उठाए गए जिला प्रशासन की विस्तृत जांच में सामने आया कि 17 प्रकरणों में मुआवजा वितरण के दौरान गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। आरोप है कि मृतकों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर फर्जी तरीके से मुआवजा के नाम से से सरकारी राशि निकाल ली गई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस खेल में केवल आवेदक ही नहीं, बल्कि कुछ वकील, डॉक्टर और परिजन भी शामिल थे। यानी सरकारी मुआवजे को लूटने के लिए पूरा नेटवर्क काम कर रहा था। कार्रवाई के तहत सरकंडा में 5, कोनी में 3, सिविल लाइन में 3, तोरवा में 2 और सिटी कोतवाली में 1 FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर इस पूरे रैकेट की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
विधायक का बड़ा आरोप…
बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला का कहना है कि FIR दर्ज होना शुरुआत भर है। कांग्रेस शासनकाल में हुए इस कथित घोटाले में शामिल अन्य लोगों और संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। विधायक का आरोप है कि बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर फर्जी प्रमाण पत्र, दस्तावेज और मुआवजा वितरण संभव ही नहीं है। इसलिए पूरे सिंडिकेट को बेनकाब किया जाना जरूरी है
अब “लू घोटाले” पर सवाल…
सर्पदंश मुआवजा मामले के बाद विधायक ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उनका कहना है कि विधानसभा में लू से मौत के आंकड़ों पर पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से केवल बिलासपुर, दुर्ग और शक्ति जिलों में ही मौतें दर्ज होना बताया गया। इस पर कटाक्ष करते हुए विधायक ने सवाल उठाया कि क्या पूरे छत्तीसगढ़ में गर्मी और लू सिर्फ तीन जिलों में ही चलती है? क्या बाकी जिलों में एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई?
विधायक का कहना है कि यह आंकड़े खुद संदेह पैदा करते हैं और मुआवजा वितरण में गड़बड़ी की आशंका को मजबूत करते हैं। इसलिए लू से मौत के मामलों की भी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
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