रायपुर,,, राजधानी के सिलतरा स्थित आबकारी विभाग के वेयरहाउस से नष्टीकरण आदेश वाले शराब की खुले बाजार में बिक्री हो रही है! इसकी शिकायत सामने आने के बाद भी संबंधित वेयरहाउस प्रभारी और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई… अपितु प्रभारी अधिकारी को इसका इनाम देते हुए बड़ा प्रभार दे दिया गया… तानाखार विधायक तुलेश्वर मरकाम ने पिछले विधानसभा सत्र में ध्यानाकर्षण के माध्यम से यह मामला उठाया था… जिस पर सरकार और विभाग ने संज्ञान नहीं लिया… प्रभारी अधिकारी पिछले तीन साल से उक्त वेयरहाउस की प्रभार संभाल रही थीं.. जिन्हे ट्रांसफर कर अब राज्य उडऩदस्ते का प्रभार दे दिया गया है!
दरअसल ओवररेट के साथ उन शराब बोतलों की भी अवैध बिक्री किए जाने का मामला सामने आया है! जिन्हें आबकारी विभाग ने नष्ट करने का आदेश दिया था… जांच में ऐसी कई बोतलें मिलीं… जिनके नाम विभाग की नष्टीकरण सूची में दर्ज थे… लेकिन उन्हें सिलतरा वेयरहाउस से बाहर बेच दिया गया.. आबकारी विभाग ने 12 मई 2026 को 7,509 बॉक्स में रखी 3,566 बोतलों को नष्ट करने का आदेश जारी किया था… आरोप है! कि इनमें से आधे से अधिक स्टॉक को बाजार में खपा दिया गया… इस बीच सिलतरा वेयरहाउस में गड़बडिय़ों की शिकायतों के बाद वहां की प्रभारी दीप मसीह का तबादला कर दिया गया है! पाली-तानाखार विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने यह मामला विधानसभा में भी उठाया था… उन्होंने आरोप लगाया था… कि सिलतरा विदेशी शराब गोदाम में राजनीतिक और वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण में हर महीने करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हो रहा है! मरकाम के अनुसार, गोदाम प्रभारी एक भाजपा नेता की पत्नी हैं! और शराब चोरी के मामलों को छिपाने के लिए समय-समय पर सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते हैं! उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गोदाम में श्रमिकों की संख्या रिकॉर्ड में वास्तविक संख्या से अधिक दिखाई जाती है! और अतिरिक्त राशि का दुरुपयोग किया जाता है!
नष्टीकरण के बजाय बाजार में बेच रहे एक्सपायरी शराब…
आबकारी विभाग के अनुसार बहुत पुरानी हो चुकी या बिक्री अवधि के करीब पहुंच चुकी शराब और बीयर को नष्ट करने का आदेश दिया जाता है! दुकानों और गोदामों से प्राप्त जानकारी के आधार पर सूची तैयार कर वेयरहाउस प्रभारी को नष्टीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जाते हैं! आरोप है! कि कागजों में नष्टीकरण दिखाने के बाद यही स्टॉक बाजार में बेच दिया जाता है! उदाहरण के तौर पर: सेवन हिल्स बीयर की लगभग 100 पेटियां, जिन्हें एक्सपायरी के कारण नष्ट किया जाना था… अवैध रूप से बेच दी गईं… बडवाइजर बीयर की करीब 200 पेटियों को वास्तविक नुकसान से अधिक क्षतिग्रस्त दिखाया गया… परनोड कंपनी की इंपीरियल ब्लू (आईबी) शराब की लगभग 100 पेटियों को भी क्षतिग्रस्त खेप का हिस्सा बताकर अवैध रूप से बेचने का आरोप है! इस पूरे खेल में प्रभारी अधिकारी का संरक्षण और वेयरहाउस में पदस्थ कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है!
दुकान या गोदाम में यदि शराब 180 दिन (छह महीने) तक बिना बिके पड़ी रहती है! तो उसे सरप्लस स्टॉक घोषित कर दिया जाता है। इसके बाद संबंधित सप्लायर कंपनी पर बोतल के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के आधार पर डेमरेज चार्ज लगाया जाता है! जुर्माने से बचने के लिए कंपनियां और विभागीय कर्मचारी छह महीने के भीतर स्टॉक निकालने की कोशिश करते हैं! आरोप है! कि इसी नियम की आड़ में कुछ स्टॉक को बाहरी लोगों के माध्यम से खपाया जाता है! जिससे कंपनियों का स्टॉक भी क्लियर हो जाता है! और अवैध कमाई भी होती है!
ट्रांसपोर्टिंग छूट के नियम का भी दुरुपयोग….
पड़ताल में यह भी सामने आया कि शराब परिवहन के दौरान संभावित टूट-फूट को देखते हुए सरकार सप्लायर कंपनियों को 0.25 प्रतिशत ब्रेकेज छूट देती है! यानी परिवहन के दौरान बोतलें टूटने पर उसका आर्थिक नुकसान सरकार वहन करती है! और सप्लायर को पूरे स्टॉक का भुगतान मिलता है! आरोप है! कि वेयरहाउस से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी इसी प्रावधान का दुरुपयोग कर रहे हैं! ट्रकों से आने वाली खेप में बोतलों के टूटने का रिकॉर्ड दिखाकर संबंधित स्टॉक बाद में कोचियों और अवैध कारोबारियों को बेच दिया जाता है! सूत्रों के मुताबिक यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से जारी है! लेकिन अब तक किसी जिम्मेदार अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है! इस पूरे मामले में मीडिया ने संबंधित प्रभारी अधिकारी से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की लेकिन उन्होंने मोबाइल काल रिसीव नहीं किया, वहीं इस मामले में आबकारी विभाग के आयुक्त पीएस एल्मा का कहना है! कि जिस शराब को नष्ट करने का आदेश दिया गया था… उसका बेचा जाना गंभीर मामला है! इसकी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी….
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