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30 Jan 2026, Fri

गरीबो का हक मारने वाले जगदीश ट्रेडिंग कंपनी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली का चावल घोटाला,,, FIR दर्ज…

बिलासपुर,,, सरकण्डा थाना क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़े एक बड़े चावल घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस घोटाले के केंद्र में जगदीश ट्रेडिंग कंपनी और उसके मालिक रवि कुमार नागदेव का नाम सामने आया है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब खाद्य निरीक्षण दल द्वारा कंपनी के स्टॉक की जांच की गई, जिसमें गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

30 सितंबर 2024 को बिलासपुर स्थित जगदीश ट्रेडिंग कंपनी में खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा एक जांच दल भेजा गया। जांच के दौरान पाया गया कि कंपनी के पास 439.60 क्विंटल चावल और 1108.00 क्विंटल कनकी (चावल का टूटा हुआ हिस्सा) का स्टॉक दर्ज था। हालाँकि, जब मौके पर वास्तविक भौतिक सत्यापन किया गया, तो चावल का भंडार 1603.18 क्विंटल और कनकी का स्टॉक 1083.50 क्विंटल पाया गया। इससे साफ तौर पर यह संकेत मिला कि स्टॉक में गड़बड़ी की गई थी।जांच दल ने कंपनी के मालिक और संचालक रवि कुमार नागदेव से पूछताछ की। इस दौरान यह संदेह व्यक्त किया गया कि जिस चावल का स्टॉक कंपनी में पाया गया, वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीब परिवारों को वितरित किए जाने वाले चावल का हो सकता है। इसके बाद, खाद्य विभाग के गुणवत्ता निरीक्षक को बुलाकर चावल और कनकी के नमूने लिए गए। जांच के लिए लिए गए नमूनों की विस्तृत रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ कि चावल में 1.1 प्रतिशत एफ. आर. के (Fake Rice Kernel) पाया गया, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरित किए जाने वाले चावल के लिए अनिवार्य नहीं है। इस प्रकार यह पुष्टि हुई कि जगदीश ट्रेडिंग कंपनी द्वारा PDS से चावल को लेकर उसे साफ करने के बाद सामान्य चावल के रूप में बेचा जा रहा था। खाद्य विभाग के निष्कर्षों के आधार पर, कलेक्टर के निर्देशानुसार सरकण्डा पुलिस थाना में कंपनी के मालिक रवि कुमार नागदेव के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की गई है। यह मामला सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 की धारा 6 (2) के उल्लंघन और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत दर्ज किया गया ९ है, जो एक दंडनीय अपराध है। जगदीश ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ इस चावल घोटाले ने एक बार फिर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हो रही अनियमितताओं को उजागर किया है। यह घटना न केवल सरकारी योजना के तहत गरीबों के हक पर चोट करती है, बल्कि इसे एक गंभीर अपराध के रूप में देखा जाना चाहिए। जांच और कानूनी कार्यवाही से इस तरह के घोटालों पर सख्त नज़र रखने की आवश्यकता को और भी मजबूती मिली है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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