
बिलासपुर,,, बिलासपुर के प्रादेशिक पंजीयन कार्यालयों में दस्तावेज़ लेखक और स्टाम्प विक्रेता आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। लंबे समय से अपनी समस्याओं को लेकर संघर्षरत इस वर्ग के पास अब धैर्य खत्म हो गया है। उनकी मांगों की लगातार अनदेखी और नई तकनीकी योजनाओं के चलते रोजगार पर मंडराते संकट ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया है। दस्तावेज़ लेखक और स्टाम्प विक्रेताओं का मुख्य मुद्दा उनके अस्तित्व और आजीविका से जुड़ा है। उनके द्वारा बार-बार शासन को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला, ठोस निर्णय नहीं। उनकी मांगें विशेष रूप से उनकी रोजगार सुरक्षा और नई तकनीकी योजनाओं से हो रही समस्याओं को लेकर हैं।


उनके अस्तित्व और आजीविका से जुड़ा है। उनके द्वारा बार-बार शासन को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला, ठोस निर्णय नहीं। उनकी मांगें विशेष रूप से उनकी रोजगार सुरक्षा और नई तकनीकी योजनाओं से हो रही समस्याओं को लेकर हैं।

NGDRS (नेशनल जनरल दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन सिस्टम) और “ई-स्टाम्प” जैसी योजनाएं पारदर्शिता के नाम पर लागू की गई हैं, लेकिन इनसे दस्तावेज़ लेखक और स्टाम्प विक्रेताओं के काम पर भारी असर पड़ा है। इसके अलावा, “सुम ऐप” (SUM App) की शुरुआत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यह ऐप आम जनता को घर बैठे ही रजिस्ट्री कराने की सुविधा देता है, जिससे दस्तावेज़ लेखकों की भूमिका सीमित होती जा रही है। इन योजनाओं से उनका रोजगार खतरे में पड़ गया है। इस संघर्ष की शुरुआत एक दिवसीय कलमबंद हड़ताल से
हुई थी, जिसके बाद विरोध के रूप में एक सप्ताह काली
पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया गया। इसके बाद, 16 से 19
सितंबर 2024 तक तीन दिवसीय हड़ताल की गई, जहां
एक और ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद महानिदेशक
पंजीयन ने समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया था,
लेकिन एक महीने बीत जाने के बावजूद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
अंततः, 10 अक्टूबर को पुनः पत्र लिखकर मांगों को सरकार के सामने रखा गया, लेकिन इसका भी कोई उत्तर नहीं मिला। इस दौरान सरकार ने तकनीकी प्रगति के नाम पर नई योजनाओं को लागू किया, जो उनके लिए परेशानी का सबब बनती जा रही हैं। सरकार की योजनाएं, विशेष रूप से “सुम ऐप” और “एनजीडीआरएस”, पारदर्शिता और सुविधा के नाम पर लाई गई हैं। हालांकि, दस्तावेज़ लेखक और स्टाम्प विक्रेता इसे अपने रोजगार पर संकट के रूप में देख रहे हैं। डिजिटल प्रक्रियाओं के चलते उनकी भूमिका सीमित हो रही है, जिससे उनके आय स्रोत प्रभावित हो रहे हैं।
इस हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है, जो रजिस्ट्री जैसे आवश्यक कार्यों के लिए कार्यालयों में भटक रहे हैं। जमीन और मकान रजिस्ट्री कराने आए लोगों को पंजीयन कार्यालयों में दस्तावेज़ लेखकों की गैरमौजूदगी के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अगर यह हड़ताल लंबी चलती है, तो इससे ना केवल इन पेशेवरों की आजीविका प्रभावित होगी, बल्कि समाज में दस्तावेज़ संबंधित कार्यों में भी भारी रुकावट आ सकती है।
बिलासपुर के दस्तावेज़ लेखक और स्टाम्प विक्रेताओं की हड़ताल उनकी आजीविका की लड़ाई है। नई तकनीकी योजनाओं ने उनके रोजगार को कठिन बना दिया है, और सरकार की तरफ से समाधान न मिलने पर उनका आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इनकी मांगों पर क्या कदम उठाती है और किस तरह से इस हड़ताल का समाधान निकलता है।
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