
बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में पुलिस कर्मी और उसके परिवार को पुलिस विभाग की ही बर्बरता का शिकार होना पड़ रहा है! यह मामला उस वक्त सामने आया है! जब एक आरक्षक ने अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों और प्रताड़ना को लेकर उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई! लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिल पाई! इसके विपरीत, नीचे के अधिकारी उसे धमकाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहे हैं! और यदि वह दबाव नहीं बनाता तो उस पर अपराध दर्ज करने की धमकी दी जाती है!

यह मामला दो साल पुराना है! जब पीड़ित पुलिस कर्मी ने अपने ही विभाग के कुछ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनहीनता और उत्पीड़न की शिकायत की थी! शुरू में तो पीड़ित ने अपने कार्यस्थल पर उच्च अधिकारियों से मदद की अपील की थी! लेकिन किसी ने भी उसकी बातों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया! दबाव डालने पर अधिकारियों ने उसे चुप रहने और मामले को बंद करने की सलाह दी! जब पीड़ित ने न्याय के लिए कानूनी कदम उठाने की सोची, तो उसे धमकी दी गई! कि उसके खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया जाएगा! इस तरह से वह पुलिस कर्मी पिछले दो वर्षों से न्याय की तलाश में भटक रहा है!
पीड़ित आरक्षक की मां ने इस घटना के बारे में बताते हुए कहा, “हमारे बेटे ने कभी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटने का संकल्प लिया था! लेकिन अब उसे वही विभाग प्रताड़ित कर रहा है! जिसे उसने अपनी पूरी ज़िंदगी समर्पित की है! उसे अपने अधिकारियों से न्याय नहीं मिल रहा, और हम इस अन्याय का सामना कर रहे हैं!
इस मामले ने न केवल पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं! बल्कि इसने उन नागरिकों के बीच भी चिंता पैदा की है! जो पुलिस प्रशासन पर निर्भर रहते हैं! जब पुलिस कर्मी खुद ही ऐसे हालातों से गुजर रहे हैं! तो आम जनता को न्याय मिलने की संभावना कितनी है! यह एक बड़ा सवाल बन गया है!
पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से जब इस बारे में प्रतिक्रिया मांगी गई! तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है! और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी! हालांकि, स्थानीय अधिकारियों के दबाव की वजह से मामले में कोई ठोस कदम उठाने की स्थिति फिलहाल नहीं बन पाई है!
यह मामला एक उदाहरण बन गया है! कि कैसे सत्ता और ताकत के समीकरणों में फंसी पुलिस विभाग की कार्यशैली में सुधार की आवश्यकता है! पीड़ित पुलिस कर्मी के लिए न्याय का रास्ता अब और भी मुश्किल हो गया है! और यह मामला इस बात को भी दर्शाता है! कि कभी-कभी न्याय के लिए सबसे ज्यादा संघर्ष करने वाले खुद ही न्याय से वंचित हो जाते हैं!
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