
बिलासपुर,,, शासकीय अस्पताल से एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए भेजी गई महिला की जान पर बन आई और अब यह मामला तूल पकड़ते हुए एक बड़े स्वास्थ्य घोटाले के रूप में सामने आ रहा है! अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर की लापरवाही से एक महिला की हालत बिगड़ गई! जिसके बाद उसे उच्च चिकित्सा संस्थान में भर्ती कराया गया! अब CMHO ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए तीन अलग-अलग जांच कमेटियां गठित की हैं! और तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं!

यह मामला तिफरा फ्लाईओवर के पास स्थित एसकेबी हॉस्पिटल से जुड़ा है! जो तखतपुर क्षेत्र के ग्राम लाखासार निवासी सखाराम निर्मलकर अपनी बेटी सुमन को नसबंदी ऑपरेशन के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे! यहां डॉ. वंदना चौधरी ने उन्हें एसकेबी हॉस्पिटल भेजने की सलाह दी! जहां ऑपरेशन करने की बात की गई थी!
सखाराम निर्मलकर के अनुसार, ऑपरेशन के बाद सुमन को एसकेबी हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई! जबकि उसकी हालत बिगड़ती जा रही थी! उल्टियां और दर्द की शिकायत के बावजूद उसे घर भेज दिया गया! अगले दिन जब उसे जिला अस्पताल लाया गया तो स्थिति गंभीर हो गई! और फिर उसे अपोलो अस्पताल भेजा गया! जहां जांच में यह सामने आया कि ऑपरेशन के दौरान उसकी आंत फट गई थी! किसी तरह उसकी जान बचाई गई! लेकिन इलाज की लागत 7 लाख रुपये से अधिक हो गई!
यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर करती है! जिसमें सरकारी डॉक्टरों की लापरवाही के चलते एक मरीज की जान पर खतरा मंडराया! इस घटना के बाद, सखाराम निर्मलकर ने कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ और मंत्री विधायकों से शिकायत की है!और अस्पताल प्रबंधन तथा डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है!
तीन जांच कमेटियां गठित
इस मामले में सीएमएचओ डॉ. प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है! उन्होंने माना कि सरकारी अस्पताल से मरीज को बिना उचित कारण के निजी अस्पताल भेजना गलत था! इसके चलते तीन अलग-अलग जांच कमेटियों का गठन किया गया है! जिनमें नर्सिंग होम एक्ट, जिला अस्पताल और सीएमएचओ की जांच कमेटियां शामिल हैं! उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी!
अस्पतालों की लापरवाही और भ्रष्टाचार
वहीं, स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही और निजी अस्पतालों में हो रही मनमानी की आलोचना हो रही है! पिछले कुछ समय में कई मामले सामने आ चुके हैं! जिनमें निजी अस्पतालों में गलत ऑपरेशन, खराब चिकित्सा सुविधाएं, और मरीजों के इलाज में लापरवाही देखने को मिली है! यही नहीं, कुछ मामलों में तो अस्पतालों द्वारा अस्पताल से जुड़ी सरकारी योजनाओं को नकारने और मरीजों से अत्यधिक बिल वसूलने की घटनाएं भी सामने आई हैं!
सरकारी योजनाओं का असर
सरकारी योजना आयुष्मान भारत का उद्देश्य गरीबों को सस्ती और अच्छी चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है! लेकिन यह योजनाएं धरातल पर ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं! इलाज महंगा होता जा रहा है! और गरीबों के लिए इलाज की सुविधाएं उनके बजट से बाहर हो गई हैं! जैसे इस मामले में, सुमन को इलाज के लिए सात लाख रुपये का खर्च उठाना पड़ा! इसी तरह के मामलों में लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ता है! जहां खर्च अत्यधिक होता है!
स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता
यह घटना यह सवाल खड़ा करती है! कि क्या हमारी स्वास्थ्य प्रणाली वाकई मरीजों के हित में काम कर रही है! या केवल निजी अस्पतालों और डॉक्टरों के लाभ के लिए? सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही, मरीजों की भलाई को नजरअंदाज करना, और निजी अस्पतालों में पैसे के खेल ने एक नई बहस को जन्म दिया है! अब यह देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं! और कब तक स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं!
निष्कर्ष:
एसकेबी हॉस्पिटल कांड ने न केवल एक परिवार की मुश्किलों को बढ़ाया! बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को भी उजागर किया!अब सवाल यह है! कि क्या प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाएगा और क्या इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोई सख्त उपाय किए जाएंगे!
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