
बिलासपुर,,, अपोलो अस्पताल के प्रबंधन के खिलाफ शहर में जबर्दस्त जनाक्रोश देखने को मिल रहा है! यह आक्रोश उस वक्त और भी बढ़ गया जब विधायक द्वारा दी गई चेतावनी के बावजूद अपोलो अस्पताल ने आयुष्मान भारत योजना के तहत जरूरतमंदों का इलाज करने से इंकार कर दिया! इसके बाद नागरिकों का गुस्सा खुले तौर पर फूट पड़ा है! और वे यह सवाल उठा रहे हैं! कि जब जमीन सरकार की है! इलाज के खर्चे का भुगतान भी सरकार द्वारा किया जा रहा है! तो अपोलो प्रबंधन को इसमें दिक्कत क्यों है? अब लोगों का मानना है! कि अपोलो अस्पताल को गरीब और जरूरतमंद लोगों का इलाज मुफ्त में करना ही होगा!
न्यूज बास्केट की टीम ने मंगलवार को शहर के नागरिकों से बातचीत की और यह जानने की कोशिश की कि आखिर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के घायल और बीमार लोग कहां जाएं!इन परिवारों को निजी अस्पतालों के बढ़ते खर्चे से भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है! सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने के बावजूद, उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पतालों में भारी खर्चों का सामना करना पड़ता है! जो इन परिवारों के लिए संभव नहीं है!
निजी अस्पतालों के बढ़ते खर्चे और सरकार की योजनाओं का सवाल
बिलासपुर शहर के नागरिकों ने सरकार की योजना, जैसे कि आयुष्मान भारत, की आवश्यकता को महसूस किया है! लेकिन कई लोग इस बात से चिंतित हैं! कि निजी अस्पतालों में इलाज की महंगी दरें उनके लिए एक बड़ी बाधा बन रही हैं! एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “आयुष्मान भारत योजना के तहत हमें इलाज मिलने का भरोसा था! लेकिन जब ऐसे अस्पताल इसका पालन नहीं कर रहे हैं! तो यह बहुत निराशाजनक है! सरकार ने जमीन दी है! योजना लागू की है! और पैसा भी सरकार दे रही है! तो अपोलो अस्पताल को इलाज में सहयोग क्यों नहीं करना चाहिए?”
वहीं, कुछ अन्य नागरिकों का कहना है! कि अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों का यह कर्तव्य बनता है! कि वे सरकारी योजनाओं का पालन करते हुए समाज के गरीब और जरूरतमंद वर्ग का इलाज करें! क्योंकि यह उन अस्पतालों को सस्ते इलाज की सुविधा प्रदान करने की जिम्मेदारी है! खासकर तब जब यह योजना सरकार द्वारा समर्थित है!
आदिवासी क्षेत्रों के लिए विशेष चिंता
बिलासपुर के आसपास के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह समस्या और भी गंभीर है! आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों के लोग इलाज के लिए शहर नहीं आ सकते! और अगर शहर के प्रमुख अस्पताल सरकारी योजनाओं के तहत इलाज देने से इंकार करते हैं! तो इन इलाकों के लोग कहां जाएंगे? कई नागरिकों ने इस बात का जिक्र किया कि इन इलाकों के गरीबों के लिए अपोलो अस्पताल ने जमीन दी थी! और यह इलाज सरकार द्वारा दिए गए संसाधनों से होना था! तो इस स्थिति में कोई कारण नहीं बनता कि अस्पताल गरीबों के इलाज से इंकार करे!
क्या है अपोलो प्रबंधन की स्थिति?
जहां एक ओर लोग अपोलो अस्पताल प्रबंधन की कड़ी आलोचना कर रहे हैं! तो वहीं अपोलो प्रबंधन ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है! हालांकि, कुछ अस्पताल प्रबंधन के सूत्रों ने यह जानकारी दी कि अस्पतालों को अपनी ऑपरेशन लागतों को देखते हुए कई बार सरकारी योजनाओं के तहत इलाज करने में कठिनाई महसूस होती है! इसके बावजूद, अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों से यह उम्मीद की जाती है! कि वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं और सरकारी योजनाओं का पालन करें! ताकि समाज के हर वर्ग को इलाज की सुविधा मिल सके!
निष्कर्ष
इस पूरे मामले से यह साफ होता है! कि जब सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाना प्राथमिकता हो, तो अस्पतालों को भी अपना हिस्सा निभाना चाहिए! जनता का गुस्सा और आक्रोश इस बात का संकेत है!कि अगर अपोलो जैसे बड़े अस्पतालों द्वारा इस मामले को नजरअंदाज किया गया! तो यह सिर्फ जन विरोध को जन्म देगा, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर भी गंभीर सवाल खड़े कर देगा! इस प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है! जिसमें सभी वर्गों को समान और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें!
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