
बिलासपुर,,, जरहाभाटा स्थित चर्चित एस.के.बी. मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की लापरवाही के कारण स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर कार्रवाई करते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (ओटी) को सील कर दिया है! यह कदम हॉस्पिटल में ओटी के संचालन में मानक उल्लंघन के चलते उठाया गया! इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है! और स्वास्थ्य महकमे में भी खलबली मच गई है!

यह मामला तब सुर्खियों में आया जब तखतपुर क्षेत्र के ग्राम लाखासर की एक महिला ने 6 जनवरी को अपनी बेटी की नसबंदी के लिए जिला अस्पताल में परीक्षण कराया! जिला अस्पताल के डॉक्टर वंदना चौधरी ने उसे जरहाभाटा स्थित एस.के.बी. हॉस्पिटल भेजा! लेकिन वहां इलाज के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई! और उसे जिला अस्पताल फिर से रिफर कर दिया गया! बाद में अपोलो हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला के परिवार को करीब 7 लाख रुपये का खर्च आया! इस घटना के बाद महिला के परिवार ने कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ और स्थानीय विधायक से शिकायत की, जिसमें उन्होंने इस इलाज की लापरवाही और खराब प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी!
सीएमएचओ डॉ. प्रमोद तिवारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग ने एस.के.बी. हॉस्पिटल का निरीक्षण किया! निरीक्षण के दौरान ओटी में कई खामियां पाई गईं! जो नर्सिंग होम एक्ट के तहत गंभीर उल्लंघन थीं! इसके बाद, अस्पताल प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए गए! और अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को आगामी आदेश तक सील कर दिया गया!
इस बारे में बात करते हुए डॉ. प्रमोद तिवारी ने बताया कि एस.के.बी. हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर में पाए गए मानक उल्लंघन को गंभीर लापरवाही मानते हुए यह कदम उठाया गया है! उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन को सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है! ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके!
स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े करती है! और हॉस्पिटल प्रबंधन के खिलाफ अब कार्रवाई की मांग तेज हो गई है! क्योंकि इस घटना ने अस्पताल के प्रबंधन और डॉक्टरों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं! कई लोगों का कहना है! कि अगर अस्पताल में पहले ही मानकों का पालन किया जाता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती!
इस मामले में जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी! फिलहाल, एस.के.बी. हॉस्पिटल के ऑपरेशन थिएटर को सील किया जा चुका है! और अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी दी गई है!कि वह जल्द ही आवश्यक सुधार करें! स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के जीवन और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया है!
यह घटना न केवल क्षेत्रीय अस्पतालों के संचालन पर सवाल खड़ा करती है! बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अस्पतालों की निगरानी की सख्ती की जरूरत को भी उजागर करती है!
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