
विलासपुर,,, जिले में इन दिनों भीषण गर्मी का कहर जारी है! और जल संकट की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है! इसी को देखते हुए कलेक्टर द्वारा बोर खनन पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है! कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं! कि किसी भी प्रकार का बोर खनन बिना एसडीएम और पीएचई विभाग की अनुमति के नहीं किया जाएगा! बावजूद इसके, शहर के बीचों-बीच, मुख्य सड़क मार्ग और थाना क्षेत्र के सामने खुलेआम बोर खनन किया जा रहा है!

ताजा मामला श्रीकांत वर्मा मार्ग स्थित मित्र विहार का है! जहां बीती रात चुपचाप बोर खनन की मशीनें लगाई गईं! और खनन का काम शुरू कर दिया गया! सूत्रों के अनुसार, यह बोरिंग पहले भी की जा रही थी! लेकिन पुलिस और मीडिया की भनक लगने पर संबंधित व्यक्ति मशीन समेत भाग गया था! इस बार श्री हनुमान जन्मोत्सव का फायदा उठाते हुए अवकाश और त्योहार के दिन का सहारा लेकर खनन का काम शुरू किया गया! तारबाहर थाना और मुख्य मार्ग से कुछ ही दूरी पर चल रहे इस कार्य की किसी को भनक तक नहीं लगी!

स्थानीय लोगों का कहना है! कि यह खनन पूरी तरह से ‘सेटिंग’ के तहत हो रहा है! खासकर मस्तूरी क्षेत्र के एक बोर खनन करने वाले का नाम बार-बार सामने आ रहा है! जिसकी सेटिंग इतनी मजबूत बताई जा रही है! कि वह बिना अनुमति के भी धड़ल्ले से बोर खनन कर लेता है! इसके एवज में मोटी रकम वसूलता है!
कलेक्टर के आदेश के अनुसार, किसी भी प्रकार के बोर खनन के लिए पीएचई और एसडीएम से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है! उल्लंघन की स्थिति में दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है! जिसमें जेल भेजे जाने तक की सजा हो सकती है! मगर नियमों को ताक पर रखकर हो रहे इस कार्य से यह साफ है! कि कुछ लोग प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर अपने निजी स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहे हैं!
दरअसल, जिले में पानी की समस्या दिन-ब-दिन गहराती जा रही है। कई हैंडपंप सूख चुके हैं और बोर में अतिरिक्त पाइप डालने की जरूरत पड़ रही है। जानकारी के अनुसार, अब 100 फीट से नीचे पानी मिलना मुश्किल हो रहा है और हर जगह गहराई बढ़ाकर पाइप डाले जा रहे हैं।
गर्मी की मार और जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि बोर खनन पर फिलहाल रोक लगाई जाए, ताकि आने वाले समय में और अधिक समस्या उत्पन्न न हो। वहीं, लोगों द्वारा यह भी सुझाव दिया गया है कि वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाए और बिना वर्षा जल संग्रहण प्रणाली के किसी भी नई बिल्डिंग या व्यावसायिक परिसर को मंजूरी न दी जाए।
साथ ही शहर में जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को पानी की कीमत समझाने और इसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। “जल है तो कल है” जैसी सोच को जमीनी हकीकत बनाना अब समय की मांग है।
प्रशासन को चाहिए कि ऐसे मामलों में तुरंत सख्त कार्रवाई करते हुए उदाहरण प्रस्तुत करे, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति नियमों का उल्लंघन कर जल संसाधनों का दोहन न कर सके।
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