
बिलासपुर,,, IPL क्रिकेट मैच के साथ-साथ ऑनलाइन सट्टे का खेल भी पूरे जोरों पर है! 22 मार्च से शुरू हुए इस क्रिकेट महाकुंभ को करीब पचास दिन होने को हैं! लेकिन इस दौरान जिले की पुलिस महकमा मैदान में पूरी तरह फेल साबित हुआ है! शुरुआती मैचों के दौरान जरूर कुछ छुटपुट कार्रवाई की गई! पर जैसे-जैसे टूर्नामेंट ने रफ्तार पकड़ी, वैसे-वैसे पुलिस की सक्रियता में ठंडक आ गई! और सटोरियों ने पूरे शहर और आसपास के इलाकों में अपनी ‘फील्डिंग’ बिछा ली!
शुरुआती ‘विकेट’ के बाद पुलिस ‘बैकफुट’ पर
पुलिस की ओर से आईपीएल शुरू होते ही सट्टा कारोबार पर नकेल कसने के निर्देश जारी किए गए थे! कुछ दिन तक थाना स्तर से लेकर जिला स्तर तक अधिकारी एक सुर में सट्टा विरोधी कार्रवाई का ‘संगीत’ गा रहे थे! शुरुआती दिनों में कुछ छोटे सटोरियों को पकड़कर कार्रवाई जरूर की गई! लेकिन धीरे-धीरे यह अभियान ठंडा पड़ गया! अब आलम यह है! कि ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा खुलेआम पुलिस की ‘नाक के नीचे’ फल-फूल रहा है!
सूत्रों का खुलासा – पुलिस कर्मियों की मिलीभगत से चल रहा गोरखधंधा
सूत्रों का दावा है! कि इस अवैध धंधे को परवान चढ़ाने में कुछ नामचीन पुलिसकर्मियों की भी अहम भूमिका है! वर्षों से महकमे में दबदबा बनाए इन कर्मचारियों ने अधिकारियों को अपने प्रभाव में लेकर सट्टा कारोबार में हिस्सेदारी बना ली है! रणनीतिक रूप से पूरे सिस्टम को ‘मैनेज’ कर सट्टे के इस जाल को शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक फैला दिया गया है!
नंबरी सट्टा पर दिखावे की कार्रवाई, असली खाईवाल अब भी बेखौफ
आईपीएल सट्टा के नाम पर पुलिस सिर्फ नंबरी सट्टा चलाने वाले गरीब मजदूरों को पकड़ कर खानापूर्ति कर रही है! जबकि शहर में 50 से अधिक बड़े खाईवाल करोड़ों के दांव चला रहे हैं! इन्हें पकड़ने में न तो कोई बड़ी कार्रवाई हुई और न ही कोई रणनीति सामने आई! ऑनलाइन सट्टे में खाईवाल बाकायदा ID बनाकर ग्राहकों को मुहैया करा रहे हैं! जिसमें वे अपनी जरूरत के हिसाब से रकम डालकर खेल सकते हैं!
बचा हुआ समय, बड़ी चुनौती – क्या पुलिस कर पाएगी ‘कमबैक’?
अब जबकि आईपीएल खत्म होने में कुछ ही दिन बाकी हैं! देखना यह होगा कि पुलिस महकमा आखिरी पलों में कैसी पारी खेलता है! क्या ये ‘मैच’ जीतने की कोई ठोस कोशिश होगी या फिर इस बार भी खानापूर्ति कर पुलिस खुद ‘क्लीन बोल्ड’ हो जाएगी..?
पुलिस की निष्क्रियता, मिलीभगत के आरोप और खुलेआम चल रहा करोड़ों का ऑनलाइन सट्टा – ये सारे सवाल अब सिस्टम की नीयत और नाकामी पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं।
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