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30 Jan 2026, Fri

मृत्यु के बाद भी जीवन का संदेश: कारोबारी दरविंदर सिंह ने पत्नी प्रीति टुटेजा का किया देहदान, मेडिकल छात्रों की पढ़ाई में होगा उपयोग…

बिलासपुर,,,, मृत्यु का अंत नहीं होता, यदि जीवन को किसी और के जीवन का आधार बनाया जाए! बिलासपुर के प्रसिद्ध कारोबारी दरविंदर सिंह टुटेजा ने इसी सोच के साथ अपनी पत्नी स्वर्गीय प्रीति टुटेजा की मृत्यु के उपरांत उनका पार्थिव शरीर सिम्स के मेडिकल छात्रों की शिक्षा के लिए समर्पित कर मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है!

दरअसल, स्वर्गीय प्रीति टुटेजा के निधन के पश्चात उनके पति दरविंदर सिंह ने यह संकल्प लिया था! कि वे उनकी देह को मेडिकल शिक्षा के लिए दान करेंगे! जिससे भावी चिकित्सकों को अध्ययन और प्रशिक्षण का अवसर मिल सके! शनिवार को यह संकल्प साकार हुआ जब दरविंदर सिंह और उनके परिजनों ने सिम्स (छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़) में देहदान की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की!

इस मौके पर परिवार के सदस्यों की आंखों में भावनाएं जरूर थीं! पर गर्व भी उतना ही था! कि उनकी प्रिय सदस्य मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन और ज्ञान का साधन बन रही हैं!!!

स्वर्गीय प्रीति टुटेजा का जीवन भी उतना ही प्रेरणादायक था! जितना उनका अंतिम योगदान! वे सामाजिक कार्यों में रुचि रखती थीं! और शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष संवेदनशीलता रखती थीं! उनके पति दरविंदर सिंह ने बताया कि यह निर्णय उन्होंने स्वयं प्रीति टुटेजा की इच्छा को ध्यान में रखते हुए लिया, जो हमेशा समाज के लिए कुछ सकारात्मक करना चाहती थीं!!!

सिम्स प्रबंधन की ओर से भी इस प्रेरणास्पद पहल की सराहना की गई! संस्थान के अधिकारियों ने कहा कि ऐसे देहदान चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में अत्यंत सहायक होते हैं! और समाज में जागरूकता बढ़ाते हैं!

सामाजिक कार्यकर्ताओं और शहर के प्रबुद्धजनों ने इस कार्य को मानवता का सर्वोच्च उदाहरण बताया! लोगों ने कहा कि मृत्यु के बाद जब व्यक्ति का शरीर भी किसी काम आ जाए, तो वह वास्तविक जीवनदायिनी सोच होती है!!!

दरविंदर सिंह ने यह भी अपील की कि समाज में अधिक से अधिक लोग देहदान और अंगदान के प्रति जागरूक हों, ताकि विज्ञान, चिकित्सा और मानव सेवा के क्षेत्र को मजबूती मिले!!!

इस संवेदनशील अवसर पर परिवार के सदस्यों के साथ-साथ मित्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सिम्स के चिकित्सकों की उपस्थिति रही!!!

स्वर्गीय प्रीति टुटेजा का यह अंतिम उपहार न केवल चिकित्सा क्षेत्र को समृद्ध करेगा, बल्कि समाज को भी आत्मदान की इस परंपरा से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा!!!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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