
बिलासपुर,,, जिले में एक और सरकारी राशन घोटाले ने प्रशासन और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं! मोपका वार्ड नंबर 47 में स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान से जुड़े इस मामले में कार्डधारियों के राशन कार्ड पर “ड्यू” की सील मारकर दो से तीन महीने का चावल, शक्कर और नमक गबन करने की गंभीर शिकायतें सामने आई हैं!
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है! कि बिना राशन दिए उनके कार्ड पर वितरण की एंट्री कर दी गई है! जिससे उन्हें अब अगले महीनों में भी राशन नहीं मिल पाएगा! इन शिकायतों के बीच खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया ने कहा है! कि मामले की जांच कराई जाएगी! लेकिन इससे पहले भी कई मामले जांच की बात पर ही अटक गए हैं!
सवा 55 लाख का पुराना मामला अब भी अधूरा का अधूरा
बिलासपुर जिले में राशन घोटालों की यह कोई पहली घटना नहीं है! हाल ही में पांच कांग्रेस नेताओं के खिलाफ 55 लाख रुपए से अधिक के राशन गबन का मामला सामने आया था! जिसमें अब तक न तो एफआईआर हुई है! और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई! ऐसे में यह नया मामला भी जांच और फाइलों में दबी रिपोर्टों तक सिमटता नजर आ रहा है!
पीडीएस सिस्टम में मची है ‘धनिया’
लगातार उजागर हो रहे राशन घोटालों ने जिले के सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की साख को गहरा आघात पहुंचाया है! गरीबों के नाम पर चल रही यह योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती जा रही हैं! और जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति कर रहे हैं!
मंगला चौक का ‘मांडवाली सेंटर’ फिर सवालों में
सूत्रों की मानें तो मंगला चौक का एक विशेष दुकान लंबे समय से चर्चा में है! जिसे “मांडवाली सेंटर” कहा जा रहा है! यह आरोप लगाए जा रहे हैं! कि यहीं से सारे गबन और बंदरबांट की योजना बनाई जाती है! और अलग-अलग दुकानों के माध्यम से अमल में लाई जाती है!
पीड़ित कौन हैं?
मोपका वार्ड नंबर 47 के सैकड़ों कार्डधारियों को उनके हक का राशन नहीं मिला! कार्ड पर ड्यू की मुहर लगाकर यह दिखा दिया गया कि उन्हें राशन मिल चुका है! महिलाएं, बुजुर्ग और गरीब परिवार अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं!
खाद्य नियंत्रक का बयान
अनुराग भदौरिया, खाद्य नियंत्रक बिलासपुर का कहना है!
“मोपका वार्ड नंबर 47 का मामला संज्ञान में आया है! इसकी जांच कराई जाएगी! दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी!
सवाल यह भी
जब एक के बाद एक घोटाले उजागर हो रहे हैं! तो अभी तक किसी भी अधिकारी या प्रतिनिधि पर ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
गरीबों के राशन पर इस तरह डाका डालने वाले आखिर किसके संरक्षण में हैं?
क्या पीडीएस सिस्टम को सच में सुधारा जा सकेगा या यह घोटालों का स्थायी अड्डा बन चुका है?
राशन घोटाले की यह नई कड़ी “ड्यू एंड क्लियर-2” यह दर्शाती है! कि जिले में गरीबों की थाली में डाका डालने वालों का मनोबल बढ़ा हुआ है! जांच की बात तो बार-बार होती है! लेकिन कार्रवाई के नाम पर सबकुछ ‘ड्यू’ ही रह जाता है — और सिस्टम खुद ही खुद को ‘क्लियर’ कर लेता है!
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