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21 Jan 2026, Wed

जिला बाल संरक्षण टीम ने रुकवाया बाल विवाह,नाबालिक बच्ची के चेहरे पर आई मुस्कानजिला बाल संरक्षण टीम ने रुकवाया बाल विवाह,नाबालिक बच्ची के चेहरे पर आई मुस्कान

बिलासपुर – महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी तारकेश्वर सिन्हा के दिशा निर्देश व जिला बाल संरक्षण अधिकारी उमाशंकर गुप्ता जिला बाल संरक्षण इकाई के मार्गदर्शन पर विभाग, जिला मे होने वाले बाल विवाह के प्रति संवेदनशील है सूचना मिलते ही तत्काल मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाइए देते हुए वैधानिक कार्रवाई करती है. जिसका परिणाम है कि बिलासपुर जिला में बाल विवाह जैसे कुरीतियां पूरी तरह बंद होती नजर आ रही है.

गौरतलब है कि भारत में, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के मुताबिक, शादी के लिए एक लड़की की उम्र 18 साल और लड़के की उम्र 21 साल होनी चाहिए. अगर इससे कम उम्र में लड़के और लड़की की शादी कराई जाती है, तो इसके लिए क़ानून में सज़ा का प्रावधान किया गया है. बाल विवाह को रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग सदैव तत्पर रहती है.
इसी तारतम्य में बिलासपुर जिला पर बाल विवाह की सूचना मिलते ही सयुंक्त टीम गाँव पहुंचकर बाल विवाह रूकवा रही है. बताया जाता है कि विगत कुछ दिनों पूर्व कोनी थाना परिक्षेत्र के अंतर्गत दो बाल विवाह को रोका गया एवं बुधवार को सरकंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत चिंगराज पारा में भी एक बाल विवाह रोकने में विभाग को सफलता मिली है बताया जाता है कि 16 वर्ष 6 माह की नाबालिक का बाल विवाह कराया जा रहा था. सूचना मिलते ही विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गए और आनंन फानन मे मौके पर पहुंचकर विवाह रोकाया गया साथ ही परिजनो को बताया गया कि बाल विवाह एक कानूनी अपराध है इसलिए शासन के निर्धारित आयु सीमा पूर्ण होने के पश्चात ही बालिका का विवाह कराया जाए. साथ ही बालिका एवं उनके परिजन को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 धारा 2 (क) के तहत 2 वर्ष तक कठोर कारावास अथवा एक लाख तक जुर्माना या दोनो का प्रावधान होने की जानकारी भी दिया गया ।
बाल विवाह रोकथाम दल मे जिला बाल संरक्षण अधिकारी जिला महिला बाल विकास अधिकारी श्री उमाशंकर गुप्ता,बाल विकास परियोजना अधिकारी एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी दीप्ती पटेल ,विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी अजय पटेल, चाइल्ड हेल्पलाइन से जिला समन्वयक पुरषोत्तम पाण्डेय , नंदकुमार पांडेय आंगनबाड़ी सुपरवाइजर ,कार्यकर्ता,वार्ड पार्षद व थाना सरकंडा आदि का विशेष योगदान रहा।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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