
बिलासपुर,,,,, छत्तीसगढ़ का बिलासपुर शहर हर साल दशहरे के मौके पर भक्ति और आस्था का एक अनोखा केंद्र बन जाता है। जी हां… हम बात कर रहे हैं हटरी चौक स्थित 152 साल पुराने श्रीराम-सीता-हनुमान मंदिर की, जिसकी परंपरा पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बनी रहती है।
इस मंदिर की खासियत यह है कि यह सालभर बंद रहता है और केवल विजयादशमी के दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इस साल भी मंदिर का पट दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक यानी महज 5 घंटे के लिए खोला गया। लेकिन इन 5 घंटों का इंतजार श्रद्धालु पूरे साल करते हैं।
मंदिर खुलने से कई घंटे पहले ही भक्तों की लंबी कतारें लगना शुरू हो गई थीं। दूर-दराज के गांवों से लेकर दूसरे राज्यों तक से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचे। भक्तों का मानना है कि दशहरे के दिन यहां भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी के दर्शन मात्र से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
इस मंदिर की ऐतिहासिक मान्यता बेहद रोचक है। बताया जाता है कि पहले यहां एक नीम का पेड़ हुआ करता था। जब वह पेड़ सूखकर गिरा, तो उसकी जड़ों से अपने आप श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी की प्रतिमाएं निकलीं। इसके बाद विधि-विधान से मंदिर की स्थापना हुई। यही कारण है कि यह स्थान भक्तों के लिए चमत्कारिक आस्था का प्रतीक बन गया।मंदिर के संचालकों के अनुसार, पुराने समय में जब मंदिर खुला रहता था और लोग प्रतिमाओं को सीधे छूते थे,
तो कई अप्रिय घटनाएं सामने आईं। इन्हीं कारणों से मंदिर को सालभर के लिए बंद रखने और केवल दशहरे के दिन ही खोलने का निर्णय लिया गया। मान्यता है कि इस दिन भगवान प्रसन्न रहते हैं और भक्तों की सारी गलतियों को माफ कर देते हैं।इस मंदिर में मन्नतों की परंपरा भी बेहद अनोखी है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए लाल कपड़े में नारियल बांधते हैं और उस पर अपना कोई विशेष चिन्ह बनाकर मंदिर परिसर में टांग देते हैं।
जब उनकी मन्नत पूरी हो जाती है, तो वही नारियल खोलकर फोड़ दिया जाता है। पहले जहां हर साल 200 से 300 नारियल ही चढ़ते थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 1100 से ज्यादा हो गई है। यह इस मंदिर की लोकप्रियता और श्रद्धा का प्रमाण है।मंदिर में दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां आकर उन्हें अलौकिक शांति और सुख की अनुभूति होती है। कई भक्तों ने बताया कि यहां मांगी गई मन्नत हमेशा पूरी होती है, इसलिए वे सालभर इस दिन का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
आज दशहरे के मौके पर जब मंदिर के द्वार खुले तो पूरा परिसर जयकारों
से गूंज उठा। “जय श्रीराम”, “जय हनुमान”, और “जय माता सीता” के नारों के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। भक्ति, विश्वास और परंपरा का यह संगम हटरी चौक को आस्था का महासागर बना देता है।बिलासपुर का यह अनोखा मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और विश्वास का प्रतीक है। दशहरे पर इसकी रौनक देखते ही बनती है। भक्तों का यही विश्वास है कि यहां दर्शन करने से न सिर्फ मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बल्कि जीवन भी सुख-समृद्धि से भर जाता है।
बाइट:- किरण कौशिक (श्रद्धालु)
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