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21 Jan 2026, Wed

सिंदूर की होली में डूबी श्रद्धा, विदाई में छलके जज़्बात! मां दुर्गा को आंसुओं और उल्लास के बीच दी भावभीनी विदाई…

बिलासपुर,,,, आज विजयादशमी का पावन पर्व है. नवरात्रि की धूमधाम के बाद अब समय है मां दुर्गा को विदा करने का। बिलासपुर के मिलन मंदिर पंडाल में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। मां दुर्गा की पूजा-अर्चना, हवन और विशेष अनुष्ठानों के साथ विदाई की रस्में निभाई गईं। सबसे पहले भक्तों ने विधि-विधान से मां दुर्गा का पूजन किया। इसके बाद पुष्पांजलि का कार्यक्रम हुआ,

जहां श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में फूल अर्पित किए। मंदिर परिसर “जय माता दी” और “दुर्गा मां की जय” के नारों से गूंज उठा।सबसे आकर्षण का केंद्र रहा बंगाली परंपरा का सिंदूर खेला। परंपरा के अनुसार सबसे पहले समाज की सबसे बुजुर्ग महिला ने माता को सिंदूर और खोईचा अर्पित कर विदाई दी।

इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद अन्य महिलाओं को सिंदूर लगाया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सुहागिन महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर मां की विदाई की रस्म पूरी की।देखते ही देखते माहौल हो गया सिंदूर की होली जैसा… लाल रंग से सराबोर महिलाएं, चेहरे पर आस्था की चमक, हाथों में थाली और वातावरण में गूंजती उलूक ध्वनि यानी उल्लू की आवाज़… जिसे हर शुभ अवसर पर निकाला जाता है। इस ध्वनि के बीच महिलाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था।

बंगाली समुदाय की महिलाओं ने बताया कि यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है। हर साल वे धूमधाम से नवरात्रि और दुर्गा पूजा मनाते हैं। उनका मानना है कि नवरात्र के 9 दिनों तक मां दुर्गा अपने मायके आती हैं, और दशहरे के दिन उनकी विदाई होती है। जिस तरह घर से बेटियों की विदाई होती है, उसी तरह मां की विदाई भी आंसुओं और खुशियों के बीच की जाती है।

खास बात ये है कि सिंदूर खेला सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि यह शक्ति, सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर ये आशीर्वाद देती हैं कि सबका वैवाहिक जीवन सुखमय रहे, घर-परिवार में खुशियां बनी रहें और मां दुर्गा का आशीर्वाद सदा मिलता रहे।पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण भक्तिमय और जोशीला रहा। बच्चे, युवा, बुजुर्ग सभी ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। महिलाओं के चेहरे पर जहां माता को विदा करने की उदासी थी,

वहीं परंपरा निभाने का गर्व और उल्लास भी साफ झलक रहा था।कहा जा सकता है कि विजयादशमी पर बंगाली समाज का यह सिंदूर खेला आयोजन सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और एकता का उत्सव है। यहां महिलाएं न सिर्फ मां को विदा करती हैं, बल्कि एक-दूसरे को शक्ति और शुभकामनाओं का संदेश भी देती हैं।आज का दिन भावनाओं, परंपराओं और आस्था से भरा रहा।बिलासपुर में मां दुर्गा की विदाई, सिंदूर की होली और भक्तों का उत्साह… सब मिलकर इसे बना दिया यादगार विजयादशमी

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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