
बिलासपुर,,, जिले में मेडिकल बिल के भुगतान के लिए 10 प्रतिशत कमीशन मांगने वाले बाबू को बहाल कर उसी ऑफिस में पदस्थ कर दिया गया है! यह ऐसा पहला मामला है! जिसमें दोषी पाए जाने के बाद भी न तो विभागीय जांच की गई और न ही आरोप पत्र जारी किया गया! जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने उसे केवल चेतावनी देकर दोष मुक्त कर दिया है! दरअसल, गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल खपरी के सहायक शिक्षक संतोष कुमार साहू ने मेडिकल बिल भुगतान के लिए बीईओ ऑफिस मस्तूरी में आवेदन जमा किया था!

इलाज में हुए खर्च सहित सभी दस्तावेज पेश करने और उनका परीक्षण करने के बाद कार्यालय से उनका 1 लाख 87 हजार 459 रुपए स्वीकृत हुआ था!

बीईओ कार्यालय मस्तूरी में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 सीएस नौरके ने 9 जुलाई की रात 8.30 बजे उनके मोबाइल पर कॉल कर मेडिकल बिल की रकम उनके खाते में जमा करने के एवज में 10 प्रतिशत कमीशन मांगा! कमीशन देने में असमर्थता जताने पर भुगतान रोक दिया गया! जिससे परेशान होकर उसने डीईओ और कलेक्टर से शिकायत की थी! इसमें बातचीत का ऑडियो भी सौंपा गया था!
ऑडियो वायरल होने पर किया सस्पेंड पहले तो शिकायत के बाद भी अफसरों ने मामले को नजरअंदाज कर दिया! जिसके बाद कमीशनखोरी का ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ, मामला मीडिया में आया तो डीईओ ने कमीशन मांगने वाले क्लर्क को सस्पेंड कर दिया! डीईओ ने लिपिक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जारी किए गए निलंबन आदेश में साफ लिखा था! कि लिपिक के उस कृत्य से विभाग की छवि धूमिल हुई है! जांच में दोषी फिर भी कर दिया बहाल इस मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई! जिसमें क्लर्क को कमीशन मांगने के लिए दोषी पाया गया! जिसके बाद अब 44 दिन बाद डीईओ ने उसे फिर से बहाल कर दिया। जारी आदेश में लिखा है कि वह भविष्य में दोबारा ऐसी गलती करता है तो कार्रवाई होगी। खास बात यह है कि जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी न तो विभागीय जांच की गई और न ही आरोप पत्र जारी किया गया।
दोष साबित होने पर बहाल करने का पहला मामला डीईओ के बहाली आदेश में साफ लिखा है कि जांच में वह दोषी पाया गया था। जांच में दोष साबित होने के बाद चेतावनी देकर बहाल करने का यह पहला मामला है। बड़ी बात यह है कि उसे फिर से उसी बीईओ ऑफिस में पदस्थ कर दिया गया है, जहां रहते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई हुई थी।
DEO बोले- कोई जाने को तैयार नहीं हुआ, इसलिए करना पड़ा बहाल DEO विजय टांडे का कहना है कि कमीशन मांगने के दोषी लिपिक को बहाल कर दिया गया है और पोस्टिंग भी कर दी गई है। आवश्यकता के हिसाब से यह निर्णय लिया गया है। वहां जाने के लिए कोई और तैयार नहीं हुआ, इसलिए बहाल करना पड़ा। दोष सिद्ध हुआ है, इसलिए उसे सजा दी गई है। वेतन वृद्धि रोकी गई है। दोबारा ऐसा करने पर टर्मिनेट करने की चेतावनी दी गई है।
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