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9 Mar 2026, Mon

रेल हादसे में तकनीकी फेल या सिस्टम की चाल? मृत पायलट विद्यासागर बने बलि का बकरा, अफसरों की जिम्मेदारी पर पर्दा, यात्रियों का भरोसा पटरी से उतरा…

00 रोज लाखो लोग करते है! रेल से सफर…

00  रेल हादसे की जांच के लिए दर्जन भर रेलकर्मी तलब…

बिलासपुर,,,, न्यायधानी के रेल प्रशासन ने इतने बड़े रेल हादसे को पता न पावय सीताराम की तर्ज पर मृत लोको पायलट विद्यासागर को बलि का बकरा ठहरा असल जिम्मेदारों पर पर्दा डाल दिया! न सिग्नल भ्रम की शिकायत की फाइल लटकाने वाले अफसरों का कोई फाल्ट दिखा और न ही बिना ट्रेनिंग मालगाड़ी के चालक को यात्री ट्रेन में चढ़ाने वालो पर पता नही कहा से क्या ईशारा मिला पुलिस ने आनन-फानन में मृत लोको पायलट पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर पूरे मामले को सलटा ढिया गया जिसकी जमकर चर्चा है!



दो दिन पूर्व गत 4 नवंबर को लालखदान ओवरब्रिज के आगे चौकसे कॉलेज के पीछे रेल लाइन पर गेवरा-बिलासपुर मेमू उसी लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गई…! हादसा इतना भयावह था! कि ट्रेन के इंजन के परखच्चे उड़ गए…! बोगियां पटरी से बेपटरी हो गई…! ट्रेन के बाहर से लेकर अंदर तक लाशें बिखरी पड़ी थी…! घायल चीखते चिल्लाते बचाव करने पुकारते रहे! ट्रेन की बोगी के अंदर फंसे पायलट और स्टाफ को बोगी को कटवाकर बाहर निकालना पीडीए तब तक पायलट विद्यासागर दम तोड़ चुके थे! वही महिला सहयोगी को गम्भीर अवस्था मे भर्ती है! इस हादसे में मौतों का सरकारी आंकड़ा दर्जन भर और घायलो कि तादात दो दर्जन से अधिक बताई गई…! राहत की फुहार बरसाई गई मामले की जांच करा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का रट्टा लगाया गया पर वन डे जांच रिपोर्ट ने लोगो को अंदर तक हिला दिया…!

ये बताई जा रही रेलवे की प्रारंभिक रिपोर्ट

बताया जा रहा कि रेलवे की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेन की रफ्तार 76 किलोमीटर प्रतिघन्टे थी! “लोको पायलट ने रेड सिग्नल पार किया और ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई…!

ये बताई जा रही हकीकत

नौकरी है! उच्चाधिकारियों का डर है! इसलिए कोई खुलकर कुछ कह नही रहे…! पर मीडिया से चर्चा में वे अपनी इस विवशता को जाहिर कर सब बता रहे है…!
उनका कहना है! कि अफसर भले मृत पायलट को बलि का बकरा बना मामले को निबटा रहे पर हकीकत ये है! कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वह घुमावदार है! हाल ही में इस रूट पर 2 से बढ़ाकर 4 लाइनें की गई हैं! सिग्नलों की संख्या भी 4 से बढ़ाकर 16 की गई, लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने महीनों पहले सिग्नल भ्रम की शिकायत लिखित दी पर रेल प्रशासन ने इसका समाधान ही नहीं किया!
दूसरा विद्या सागर को महज़ माह भर पहले ही पैसेंजर ट्रेन का जिम्मा सौंपा गया था! इससे पहले वे मालगाड़ी चलाते थे! पर न तो उन्हें न नई लाइन की ट्रेनिंग दी गई…!  न नए सिग्नल सिस्टम की…


उठ रहे कई सवाल

00 क्या इतने बड़े रेल हादसे के लिए सिर्फ और सिर्फ एक मृत रेल ड्राइवर जिम्मेदार है…?
00  क्या रेलवे का सडेले सिस्टम, सुरक्षा और तकनीकी जिम्मेदारों का इसमें कोई दोष नही है…?

असिस्टेंट लोको पायलट की हालत गम्भीर

इस हादसे में घायल महिला असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज घटना की चश्मदीद गवाह है! उनका उपचार चल रहा जांच अधिकारियों को प्रारंभिक रिपोर्ट देने और मृत चालक के गले पर पूरे घटना का हार डालने की इतनी तडतडी थी! कि उन्होंने
उनके स्वस्थ्य होने तक का इंतजार तक नही किया…?
ये बताई जा रही बड़ी वजह रेलवे से जुड़े जानकारों का कहना है! कि तकनीकी खामियो, अधूरी मॉडर्नाइजेशन, और गलत सिग्नल सिस्टम ये इस बड़े हादसे की मुख्य वजह है! पर रिपोर्ट में दोषी सिर्फ एक लोको पायलट का ये बात किसी को हजम नही हो रही…?

क्या सामने आएगी सच्चाई

कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) बृजेश कुमार मिश्र की टीम ने सिग्नल इंजीनियर, सेक्शन कंट्रोलर, स्टेशन मास्टर, लोको पायलट समेत 19 अधिकारियों-कर्मचारियों को गुरुवार और शुक्रवार को पूछताछ के लिए डीआरएम कार्यालय में तलब किया है! पर सवाल यह उठ रहा कि क्या जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई कर इस तरह के हादसों पर रोक लगाने ठोस सुधार और ठोस पहल की जाएगी या फिर लाखो यात्रियों की जान से इसी तरह का खिलवाड़ होता रहेगा…

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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