
00 कहा महादेव सट्टा ऐप और फोन टैपिंग का मामला C.B.I में…
00 फिर कैसे 4 S.P को दी गई पदोन्नति, उनका तो M.P शासनकाल के है…
बिलासपुर,,,, कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक के मुख्यमंत्री को भेजे गए… एक पत्र ने खलबली मचा दी है! उन्होंने महादेव सट्टा ऐप में लिप्त दो S.P समेत अन्य मामलों में आरोपित 4 पुलिस अधीक्षकों को जांच लंबित होने के बाद भी उन्हें पदोन्नत करने और एमपी शासनकाल में उनके खुद के खिलाफ लोकायुक्त में मामला लंबित होने के कारण अनुशंसा के बाद भी उनकी पदोन्नति लटकाने को भेदभाव बताते हुए न्याय की गुहार लगाते हुए इसकी प्रतिलिपि भारत सरकार के गृहमंत्रालय के सचिव और पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़, रायपुर को भी सूचनार्थ भेजी है!

मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन को भेजे गए पत्र में कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने कहा है! कि वे भारतीय पुलिस सेवा (2012) के अधिकारी है! वर्तमान में वे पुलिस अधीक्षक कवीरधाम के पद पर कार्यरत है!

पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर उनकी पदोन्नति के संबंध में संनिष्ठता प्रमाणित करते हुए गत 10/10/2024, 26/05/202 और 31/07/2025 के माध्यम से उनके पदोन्नति की अनुशंसा की गई… किंतु उनके विरूद्ध लोकायुक्त संगठन भोपाल में जांच विवेचना स्तर पर लंबित होने को कारण उक्त पदोन्नतियों नहीं दी गई… जबकि उक्त प्रस्ताव में अन्य अधिकारियों डॉ. आनंद छाबड़ा को उनके विरुद्ध अपराध क्र.-06/24 (महादेव सट्टा ऐप) प्र.नि.अधि. 1988 यथासंशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में होने प्रशांत अग्रवाल को उनके विरुद्ध विवेचना स्तर पर अपराध क्रमांक 06/24 (महादेव सट्टा ऐप्प) प्र.नि.अधि. 1988 संशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में होने, अभिषेक पल्लव के भी उक्त अपराध कायम होकर विवेचनाधीन होने तथा रजनेश सिंह पर फ़ोन टैपिंग के मामले में अपराध क्रमांक -06/19 एवं 07/19 कायम होने के बाद भी उन्हें पदोन्नति दे दी गई…

एसपी श्री छवई ने इसे भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद-16 के तहत् अवसर की समानता का खुला उल्लंघन बताते हुए सरकार और गृह विभाग के अफसरों को भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा पदोन्नती हेतु 15/01/1999 के कंडिका-11 के जारी नियम का हवाला देते हुए कहा है! कि 11 (A)
के अनुसार अधिकारी के विरुद्ध आरोप पत्र जारी किया जा चुका हो और विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो…
11 (C) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध न्यायालय में आपराधिक प्रकरण लंवित होने पर तीन बिंदुओं के आधार पर ही किसी भी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी को पदोन्नति प्रवर श्रेणी वेतनमान के लिए अपात्र किया जा सकता है! किन्तु उनके खुद के प्रकरण में ये कंडिकाएं लागू नहीं है! फिर भी जान-बूझकर बदनियति एवं पूर्वाग्रह के चलते न तो उन्हें वरिष्ठ वेतनमान दिया जा रहा है! और न ही उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोत्रत किया गया… जो कि उनके मौलिक अधिकारों का स्पष्टतः हनन है! मेरे समान स्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है! जबकि उनके साथ भेदभाव किया गया है!
वो भी तब जब (महादेव सट्टा एय) का प्रकरण सीबीआई को स्थानांतरित करने के बावजूद उनके खिलाफ दोहरी नीति अपनाते हुए उन्हें जान-बूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है!
इस मामले में कबीरधाम एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई को उनके सेल फोन नम्बर 74772 65578 पर कॉल कर चर्चा का प्रयास किया गया पर उन्होंन रॉग नम्बर बता काल काट दिया!
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