
00 भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी के कारण तकनीक इंजीनियरिंग सब फेल…
00 1924 में शहर के ठेकेदार ने कराया था! निर्माण, 1926 में हुआ था पूर्ण…
बिलासपुर,,,, अरपा का ब्रिटिश कालीन पुराना बुढ़ा पुल 100 साल का हो गया… जो आज की नई तकनीक और फेलियर इंजीनियरिंग के सामने सीना ताने खड़ा है! शहर के ही ठेकेदार ने सन 1924 में इसका निर्माण शुरू कराया… और सन 1926 को इसे पूर्ण कर सौप दिया.. इस पुल को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में सजोकर रखने के बजाय जिला और निगम प्रशासन ने इसके ऊपर अमृत मिशन के वाटर सप्लाई के लिए भारी भरकम पाइप लाद दिया… शहर के बुद्धजीवियों ने इसका विरोध करते हुए इसे हेरिटेज स्मारक के रूप में संरक्षित करने की मांग भी की थी! पर प्रशासन नही माना…
सरस्वती शिशु मंदिर से सरकंडा जबड़ापारा को जोड़ने वाला यह अरपा नदी पर पहला पुल था! जिसे ब्रिटिश शासन ने अपने सैन्य ठिकानों पर असलहा बारूद और रसद सामग्री पहुचाने के लिए बनवाया था!
लागत 1 लाख…
उस दौर में इसकी लागत तकरीबन एक लाख रुपये बताई जा रही… शहर के ही ठेकेदार रहीम उल्ला खान पुल निर्माण के कुछ अरसे बाद अपने पैतृक निवास पाकिस्तान चले गए… पर उनका बनवाया गया पुल आज भी खड़ा है!
न छड़ न सीमेंट, चूना, गोंद, रेत के गारे और पत्थर से बना है! ये पुल…
उस दौर में न लोहे का सरिया था! न सीमेंट इसलिए चूना, गोंद, गिट्टी, रेत के गारे व पत्थर का उपयोग कर इस पुल का निर्माण कराया..
कई जगह सर्वे कराने ब्रिटिश अफसरों ने चट्टान मिलने पर प्रताप चौक से जबड़ापारा चौक के बीच इस पुल का निर्माण कराया… ये ब्रिटिशकालीन निर्माण का अद्भुत नमूना है! जो 100 साल से मजबूती से खड़ा हुआ है!
शिलालेख गायब…
कमाओ खाओ स्किम के तहत पुराने पुल के पीठ पर लदी पाइपों पर निगम प्रशासन ने लाखों रुपये रामायण की चौपाई लिखवाने में खर्च कर दी…

तुर्काडीह पुल एक दशक में ही बोल गया टे, जितने में बना था उससे ज्यादा में कराया मरम्मत…
करीब एक डेढ़ दशक पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा बनवाया गया… तुर्काडीह पुल भ्रष्टाचार का अद्भुत नमूना है! जो 7-8 साल में ही जर्जर हो गया था! प्रशासन को खतरे के मद्देनजर उस समय इस पुल को बन्द कराना पड़ा था! उस समय रेत चोरों के खिलाफ जमकर हल्ला मचा की उनकी बेतरतीब खुदाई के कारण पुल जर्जर हुआ है! पर हुआ कुछ नही फिर स्ट्रक्चरल इंजीनियर से परीक्षण करा इस पुल की मरम्मत कराई गई… जिसमे पुल के निर्माण की लागत से करीब डेढ़ से दो गुना ज्यादा का खर्च आया… जबकि आज तकनीक और इंजीनियरिंग का जमाना है!
दो नए पुल के बीच मजबूती से खड़ा है! ब्रिटिशकालीन पुल…
इस ब्रिटिशकालीन पुल के अगल- बगल आवागमन के लिए दो नए पुल का निर्माण कराया गया है! पर पुराना ऐतिहासिक पुल आज भी मजबूती के साथ अपनी पीठ पर अमृत मिशन योजना टनों भारी- भरकम पाइप लादे उसी मजबूती से खड़ा है!
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