
बिलासपुर…नगर निगम की सामान्य बजट सभा इस बार आंकड़ों और प्रस्तावों से नहीं… बल्कि एक विस्फोटक प्रकरण से गूंज उठी… लखीराम अग्रवाल सभागार में उस समय माहौल पूरी तरह बदल गया… जब सत्ता पक्ष के ही पार्षद संजय यादव ने मंदिर चौक के मामले को लेकर निगम प्रशासन पर सीधा हमला बोल दिया…
संजय यादव ने सदन के भीतर खुलकर आरोप लगाया… कि मंदिर चौक के सामने करीब 150 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत को बिना अनुमति जमींदोज कर दिया गया… यह वही इमारत थी! जिसे विरासत के रूप में संरक्षित किया जा सकता था! इसके साथ ही उस परिसर में खड़े कई विशाल पेड़—जिनकी उम्र का वैज्ञानिक आकलन तक संभव नहीं—उन्हें भी रातों-रात काट दिया गया… शहर और स्थानीय मार्गदर्शिका उन्होंने इसे शहर की ऐतिहासिक पहचान और पर्यावरण दोनों पर सीधा हमला बताया…
सदन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया… कि इस पूरे मामले को लेकर 25 से अधिक शिकायतें दी गईं… स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया… लेकिन निगम प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई…
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस जारी हुए… जबकि जमीन पर निर्माण लगातार आगे बढ़ता रहा… एक-दो बार काम रुकवाने की औपचारिक कोशिश जरूर हुई… लेकिन 24 घंटे के भीतर फिर निर्माण शुरू हो गया…
अब स्थिति यह है! कि उसी नजूल भूमि पर दो मंजिला भवन पूरी तरह खड़ा हो चुका है! और उसे व्यावसायिक उपयोग में लाने की तैयारी भी जारी है! संजय यादव ने सीधे आरोप लगाया कि यह सब अधिकारियों के संरक्षण में हुआ है! उन्होंने कहा कि बिना मिलीभगत के मुख्य मार्ग पर इतना बड़ा अवैध निर्माण संभव ही नहीं…
सदन में उनका तेवर इतना तीखा था! कि उन्होंने अपनी ही सरकार और निगम के जिम्मेदारों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया… उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब गरीबों की झोपड़ियों पर कार्रवाई में देरी नहीं होती, तो फिर रसूखदार के अवैध निर्माण पर खामोशी क्यों? यह दोहरा मापदंड बर्दाश्त नहीं किया जाएगा…

मामला तब और गरमाया जब संजय यादव ने नगर निगम कार्यालय के सामने भूख हड़ताल और उग्र आंदोलन की चेतावनी दे दी… उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक अवैध निर्माण को गिराया नहीं जाता और ऐतिहासिक इमारत व पेड़ों की कटाई के दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे… उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आंदोलन की तारीख जल्द घोषित की जाएगी…
सदन में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों ने माहौल संभालने की कोशिश की, लेकिन आरोपों की गंभीरता और तेवर की तीव्रता के चलते कुछ समय के लिए पूरी सभा में सन्नाटा छा गया…
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं! नजूल भूमि पर अवैध निर्माण, आवासीय जमीन का व्यवसायिक उपयोग, और पार्किंग के बिना खड़े हो रहे भवनों से शहर की व्यवस्था पहले ही प्रभावित है! लेकिन कार्रवाई का दायरा नोटिस तक सीमित नजर आता है!
अब यह मामला केवल एक अवैध निर्माण का नहीं…
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