
छत्तीसगढ़,,,,, छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में अवैध तंबाकू कारोबार के खिलाफ हुई ताज़ा कार्रवाई… ने न केवल एक गुप्त गुटखा फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है! बल्कि इसके पीछे सक्रिय संभावित संगठित नेटवर्क की ओर भी गंभीर संकेत दिए हैं! पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा नंदिनी थाना क्षेत्र के बासिन गांव में संचालित इस यूनिट पर की गई…. छापेमारी में ‘मुसाफिर’ और ‘M4’ जैसे ब्रांड नामों के तहत बड़े पैमाने पर जर्दा युक्त गुटखे का उत्पादन होता पाया गया….

प्रारंभिक जांच में सामने आया है! कि यह फैक्ट्री पिछले कुछ समय से बेहद गोपनीय तरीके से संचालित हो रही थी….! अप्रैल की शुरुआत से यहां उत्पादन ने तेज़ रफ्तार पकड़ी थी….! जिससे यह अंदेशा मजबूत होता है! कि तैयार माल को व्यापक स्तर पर बाजार में खपाने की योजना थी…! मौके से भारी मात्रा में तैयार गुटखा, कच्चा माल, पैकिंग सामग्री और अत्याधुनिक मशीनरी की जब्ती इस बात की पुष्टि करती है! कि यह कोई छोटी इकाई नहीं, बल्कि सुनियोजित अवैध कारोबार का हिस्सा थी…!

छापेमारी के दौरान ‘मुसाफिर’ ब्रांड के पैकेट पर कुम्हारी स्थित ‘रजत सेल्स‘ का लाइसेंस नंबर पाया गया… इससे जांच एजेंसियों के सामने एक अहम सवाल खड़ा हो गया है! क्या यह यूनिट वास्तव में उसी कंपनी से जुड़ी है! या फिर उसके नाम और लाइसेंस का दुरुपयोग कर नकली उत्पाद तैयार किए जा रहे थे? यदि दूसरी स्थिति सही पाई जाती है! तो यह मामला केवल अवैध उत्पादन ही नहीं, बल्कि ब्रांड धोखाधड़ी और उपभोक्ता के साथ छल का भी बन जाएगा…

फैक्ट्री से 13 मजदूरों की मौजूदगी भी कई सवाल खड़े करती है! ये मजदूर मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान से लाए गए बताए जा रहे हैं! पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है! ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैक्ट्री का असली संचालक कौन है! संचालन का नेटवर्क कितना बड़ा है! और मजदूरों को यहां किसके माध्यम से लाया गया… संभावना जताई जा रही है! कि इनकी गवाही से इस पूरे रैकेट की परतें खुल सकती हैं!
फैक्ट्री का मुख्य संचालक फिलहाल फरार है! जिसकी तलाश तेज़ कर दी गई है! अधिकारियों का कहना है! कि गिरफ्तारी के बाद ही इस मामले में सटीक धाराएं तय की जाएंगी… हालांकि, शुरुआती संकेतों के आधार पर फूड सेफ्टी एक्ट, धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की तैयारी है!
विशेषज्ञों का मानना है! कि इस तरह के अवैध गुटखा उत्पादन से दोहरी क्षति होती है! एक ओर सरकार को कर राजस्व का नुकसान होता है! वहीं दूसरी ओर बिना गुणवत्ता नियंत्रण के बने ये उत्पाद आम जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते हैं! जर्दा युक्त गुटखा कैंसर जैसी घातक बीमारियों का प्रमुख कारण माना जाता है! और जब यह बिना किसी मानक के तैयार होता है! तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है!
दुर्ग की यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है! कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अवैध उत्पादन लंबे समय तक कैसे चलता रहा? क्या स्थानीय स्तर पर निगरानी में चूक हुई या फिर इस नेटवर्क को संरक्षण प्राप्त था? ये ऐसे सवाल हैं! जिनका जवाब आगे की जांच में सामने आ सकता है!

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