
बिलासपुर,,,, छत्तीसगढ़ राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री राष्ट्रीय कांग्रेस के कद्दावर नेता भूपेश बघेल से जारी प्रेस नोट के अनुसार इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पंजाब में बूथ प्रबंधन कार्यक्रम के लिए समन्वयकों की नियुक्ति की है! इस सूची में बिलासपुर के तैयब हुसैन और अरविंद शुक्ला का नाम शामिल है! लेकिन इन दोनों नामों को लेकर संगठन के भीतर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है!
निष्कासन के बाद जिम्मेदारी, बढ़ा तापमान…
पूर्व पार्षद और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रहे तैयब हुसैन का नाम इस सूची में सबसे ज्यादा चर्चा का केंद्र बना हुआ है! पार्टी ने करीब दो साल पहले कई मामलों में दोषी पाते हुए उन्हें निष्कासित कर दिया था! और तब से अब तक उनका औपचारिक पुनः प्रवेश नहीं हुआ है!
दिलचस्प पहलू यह है! कि एक ओर वे पार्टी से बाहर हैं! दूसरी ओर उन्हें पंजाब की बूथ प्रबंधन समन्वय समिति में जिम्मेदारी दी गई है! राजनीतिक हलकों में इसे अपने आप में एक अनूठा और चौंकाने वाला मामला माना जा रहा है!
तत्कालीन समय में इंडियन नेशनल कांग्रेस बिलासपुर जिला इकाई के भीतर तैयब हुसैन को एक कद्दावर नेता के रूप में देखा जाता था! हालांकि पिछले दो वर्षों से उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित रहीं .. इस दौरान उन्हें कई मामलों में जिम्मेदार ठहराते हुए अनुशासन के मद्देनजरर पार्टी से पार्टी से निष्कासित किया गया… और उनकी प्राथमिक सदस्यता भी खत्म कर दी गई… पार्टी से निष्कासन के दौरान तय्यब हुसैन नगर निगम पार्षद चुनाव निर्दलीय लड़ा… जिसने उनके और संगठन के संबंधों को और जटिल बना दिया…
अब ऐसे नेता को, जिन पर निष्कासन का दाग है! और जिनकी वापसी भी नहीं हुई… सीधे चुनावी राज्य में अहम जिम्मेदारी देना—इस फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं!
अरविंद शुक्ला: जमीनी सक्रियता की पहचान…
दूसरी ओर, युवा कांग्रेस नेता अरविंद शुक्ला का चयन संगठनात्मक दृष्टि से स्वाभाविक माना जा रहा है! बिलासपुर में ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने लगातार रैलियां, सभाएं और संगठनात्मक कार्यक्रमों के जरिए अपनी सक्रियता दिखाई है!
उनकी पहचान एक ऊर्जावान और जुझारू नेता के रूप में बनी है! पूर्ववर्ती बघेल सरकार के साथ उनकी नजदीकी भी चर्चा में रही है! संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए बूथ समन्वय समिति में शामिल किया जाना उनके कार्यों की स्वीकृति के तौर पर देखा जा रहा है!
संगठन में बहस: अनुशासन बनाम प्रभाव…
बिलासपुर कांग्रेस में इस नियुक्ति को लेकर व्यापक चर्चा जारी है! वरिष्ठ नेताओं के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है! कि किसी निष्कासित नेता को जिम्मेदारी देने से पहले कम से कम उसकी औपचारिक वापसी सुनिश्चित की जानी चाहिए थी!
यह भी चर्चा है! कि विरोध करने वाले और निर्दलीय चुनाव लड़ चुके व्यक्ति को पार्टी में बिना पुनः प्रवेश दिए अहम भूमिका देना संगठनात्मक अनुशासन के लिहाज से सही संदेश नहीं देता, खासकर तब जब मामला पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य से जुड़ा हो…!
संदेश क्या जाएगा?…
फैसले ने संगठन के भीतर एक जटिल स्थिति पैदा कर दी है! कुछ कार्यकर्ता इसे अवसरवाद का संकेत मान रहे हैं! जबकि कुछ इसे नेतृत्व की रणनीतिक चाल कह रहे हैं! वहीं एक वर्ग ऐसा भी है! जो इसे प्रेरणा के रूप में देख रहा है! जहां उन्हें लगता है! कि संगठन में वापसी और पद, दोनों की संभावनाएं बनी रहती हैं!
जारी आदेश में इसके अलावा चार अन्य लोगों के भी नाम हैं! बूथ प्रोग्राम कमेटी में चार अन्य लोगो क नाम निर्मल कोसरी उधो राम वर्मा, अंकित बागबहरा और सलीम रजा उस्मानी है!
फिलहाल, यह मामला सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन, राजनीतिक संदेश और नेतृत्व के निर्णयों पर उठते सवालों का केंद्र बन गया है!
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