
बिलासपुर,,,, जिले के कलेक्टर के आदेश को सरकंडा पुलिस द्वारा “आपदा में अवसर” बनाने का आरोप लगाते हुए एक फरियादी ने पुलिस कप्तान और कलेक्टर से शिकायत की है! शिकायतकर्ता ने सरकंडा थाना पुलिस पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है! इस पूरे मामले से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल किया गया है!जिससे पुलिस महकमे में हलचल मच गई है!

शिकायतकर्ता के अनुसार 27 अप्रैल की रात करीब 3 बजे मोपका क्षेत्र में उनकी बोरिंग गाड़ी को पुलिस ने पकड़कर थाने के सामने खड़ा कराया… आरोप है! कि गाड़ी छोड़ने के एवज में सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र सिंह ने थाना प्रभारी के नाम पर 30 हजार रुपए की मांग की… शिकायतकर्ता का दावा है! कि रकम देने के बाद गाड़ी को छोड़ दिया गया…

इसके अगले दिन 28 अप्रैल को फिर वही गाड़ी पुलिस ने पकड़ी… इस बार आरोप है! कि गाड़ी छोड़ने के लिए 1 लाख 50 हजार रुपए की मांग की गई… रकम नहीं देने पर चालक और कर्मचारियों को थाने लाकर बैठा दिया गया… और पैसे देने के लिए दबाव बनाया गया… दोनों घटनाएं रात 3 से 4 बजे के बीच की बताई जा रही हैं! शिकायतकर्ता का आरोप है! कि पुलिस ने रात को गाड़ी पकड़ने के बाद छोड़ने के एवज में रुपयों की डिमांड पूरी नहीं होने के बाद राजस्व को सुबह 10 बजे के बाद सूचना देकर कार्यवाही करवाई है!
शिकायत पत्र में कहा गया है! कि सामान्य प्रक्रिया के तहत वाहन को जप्त कर सील किया जाना चाहिए था! लेकिन ऐसा न कर लोगों को थाने में बैठाना नियमों के विपरीत है! और वसूली की आशंका को जन्म देता है! फरियादी ने यह भी मांग की है! कि 27 अप्रैल की रात 3 बजे से सुबह 5 बजे थाने के सामने लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए… जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके… शिकायतकर्ता का कहना है! कि पुलिस कप्तान ने निष्पक्ष जांच के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है!
गौरतलब है! कि जिले में गर्मी के मौसम में कई इलाकों में पानी की समस्या और गिरते जल स्तर के मद्देनजर बिलासपुर कलेक्टर ने जिले में बोरिंग पर पूरी तरह बैन लगाया हुआ है! जिसके बाद भी क्षेत्र में कई जगहों में रात के समय गुपचुप तरीके से बोर का अवैध काम किया जा रहा है! लेकिन इस मामले में शिकायतकर्ता ने दावा किया है! कि 28 अप्रैल को घटनास्थल के आसपास किसी तरह का भी बोर नहीं किया गया जिसकी जांच घटनास्थल जा कर निरीक्षण कर किया जा सकता है!
गौरतलब है! कि सरकंडा क्षेत्र में रात में अवैध रेत का परिवहन काफी धड़ल्ले से बेखौफ हो कर चलता है सूचना देने के बाद भी पुलिस इसे खनिज विभाग का मामला बताकर कार्यवाही करने से बचती रहती है । जिसकी सूचना पुलिस को कई बार देने के बाद भी कार्यवाही नहीं होती है जबकि रेत से भरी गाड़िया बहतराई की तरफ से आकर अलग अलग इलाकों में पहुंच जाती है ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि इस मामला राजस्व विभाग का होने के बाद पुलिस ने कार्यवाही क्यों की.?? अब पूरे मामले का क्या सच है और क्या झूठ यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा पर इतना जरूर है कि जब तक इस तरह वसूली के आरोपों पर जब तक थानेदार की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती है तबतक इस तरह के आरोप लगते रहेंगे और दोषी छोटे पुलिसकर्मी सस्पेंड होते रहेंगे क्योंकि कहा जाता है कि बिना थाना प्रभारी की जानकारी के बिना थाने में तैनात कोई भी पुलिसकर्मी वसूली का रिस्क नहीं लेता है। और यह सबको पता है कि सिर्फ सरकंडा क्षेत्र ही नहीं लगभग जिले के हर क्षेत्र में चोरी चुपके रात में बेखौफ बोरिंग चालू है जिसपर लगाम नहीं लग पा रही है ।
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