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19 Jun 2026, Fri

श्री-श्री 108 की ‘सुपरफास्ट’ सेवा! कॉल शाम 7 बजे, एम्बुलेंस आधी रात पहुँची; वेंटिलेटर-ऑक्सीजन का बहाना, मरीज ने रास्ते में तोड़ा दम परिजनों का फूटा गुस्सा, निजी एम्बुलेंस से सांठगांठ का आरोप, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल…

00 108 सर्विसेज के चालको पर लगाया निजी एम्बुलेंस संचालको से मिली भगत का आरोप…

00 कहा देखते है! सरकार क्या कदम उठाती नही तो हम उठाएंगे…

 

बिलासपुर,,, न्यायधानी के सिम्स से एक बार फिर सरकारी एम्बुलेंस सर्विस की लापरवाही से एक मरीज की मौत होने और 108 चालको के निजी एम्बुलेंस चालको से मिलीभगत का आरोप सामने आया है! आरोप है! कि शाम 7 बजे ग़म्भीर मरीज को रायपुर शिफ्ट करने के लिए कॉल करने पर 5 घण्टे बाद रात करीब 12 बजे 108 सरकारी एम्बुलेंस पहुची, पर वेंटीलेटर न होने का हवाला दे चालक वहाँ से भाग निकला, विलम्ब से रायपुर पहुँचने के कारण मरीज ने दम तोड़ दिया… पिता की मौत से व्यथित युवक ने शासन प्रशासन की व्यवस्था को कोसते हुए पूछा कि क्या इसी दिन के लिए भाजपा की सरकार बनाई…

ये आरोप है! कोटा क्षेत्र के ग्राम केंदा के अभिषेक कुमार का, अभिषेक ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो शोषल मीडिया में पोस्ट कर जहां शासन-प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है! वही इसकी शिकायत भी सिम्स के सीएमओ से की है! शिकायत में अभिषेक ने कहा है कि उनके पिता ग़म्भीर अवस्था मे सिम्स के आईसीयू में भर्ती थे, उनकी हालत को देखते हुए उन्हें रायपुर एम्स रिफर किया गया, उन्होंने बुधवार शाम 7 बजे अपने पिता को रायपुर एम्स शिफ्ट करने एम्बुलेंस सर्विस 108 में कॉल किया करीब 5 घण्टे बाद रात करीब 12 बजे एम्बुलेंस सिम्स के पोर्च पर मरीज को लेने पहुची तो एम्बुलेंस में ऑक्सीजन और वेंटिलेटर न होने की बात कहते हुए उन्हें अपने मरीज को निजी एम्बुलेंस ले जाने कहा कुछ देर बाद चालक और स्टाफ एम्बुलेंस को छोड़कर भाग गए… नाटक नौटँकी के बाद किसी तरह एम्बुलेंस की व्यवस्था कर वे अपने ग़म्भीर पिता को रायपुर एम्स लेकर पहुचे जहा उनके पिता ने दम तोड़ दिया…

 

डॉ लखन सिंह, अधीक्षक सिम्स

स्वास्थ्य विभाग कोमा में

 

सरकारी अस्पतालों में ग्लब्स, टिटनेश इंजेक्शन, सिरिंज के टोटे के बाद अब सरकारी एम्बुलेंस सर्विस पर ग़म्भीर आरोप लगे, पीड़ित परिवार के सदस्य ने शासन- प्रशासन व्यवस्था को खुलेआम कोसा पर स्वास्थ्य विभाग के अफसर तो जैसे कोमा में है! सीएमएचओ डॉ शुभा गरेवाल को कई बार कॉल कर वस्तुस्थिति से अवगत करा उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया.. लेकिन हमेशा की तरह उन्होंने कॉल ही रिसीव नही किया… जो स्वास्थ्य महकमे की कमजोरी और शासन प्रशासन के लिए लगातार फजीहत कारी साबित हो रहा है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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