बिलासपुर,,,, हत्या के प्रयास के एक चर्चित मामले में भारतीय न्यायालय ने सिविल लाइन पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला सिंधी कॉलोनी जरहाभाठा निवासी जनरल स्टोर संचालक शंकरलाल दयालानी पर हुए कथित जानलेवा हमले से जुड़ा है।
जानकारी के अनुसार 28 जुलाई 2020 की रात गोदू चौक के पास मोतीलाल किशोर दयालानी और आशीष दयालानी ने प्रकरण वापस लेने के दबाव में शंकरलाल दयालानी पर हमला किया था। घटना में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें उपचार के लिए अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने मामूली धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया था।
पीड़ित की शिकायत पर तत्कालीन एसएसपी प्रशांत अग्रवाल के निर्देश पर मेडिकल क्वेरी कराई गई, जिसके आधार पर करीब एक वर्ष बाद मामले में हत्या के प्रयास की धारा 307 जोड़ी गई। बाद में सिविल लाइन थाने में पदस्थ निरीक्षक सनिप रात्रे के प्रतिवेदन पर बिना नई मेडिकल रिपोर्ट या अतिरिक्त जांच के धारा 307 हटाए जाने का आदेश जारी कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गंभीर अपराध की धारा हटाने की प्रक्रिया और आधार पर आपत्ति जताते हुए सिविल लाइन पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट के इस रुख के बाद मामले में पुलिस जांच और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
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