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आखिर किसके संरक्षण से सिरगिट्टी क्षेत्र मे अवैध कबाड़ का काम फल फूल रहा क्या थाना प्रभारी को नहीं है इसकी जानकारी. या कारोबारी चढ़ाते हैं चढ़वा ?

सिरगिट्टी परिक्षेत्र पर धड़ल्ले से चल रहा कबाड़ का अवैध कारोबार..
कबाड़ के अवैध कारोबारी नाबालिक से करते हैं काम..

बिलासपुर,,,सिरगिट्टी थाना परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अधिकांश एरिया पर कबाड़ का अवैध कारोबार धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा है. शहर से लेकर गाँव गाँव तक इन कबाड़ियों का नेटवर्क फैला हुआ है.इन कबाडियो पर कार्यवाही के नाम पर खाना पूर्ति कर उन्हें अभय दान दिया जा रहा है। जिसके कारण इन दिनों सिरगिट्टी पुलिस सुर्खियां बटोर रही है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कबाड़ के अबैध कारोबार करने वाले कारोबारी हर महीने मंदिर के प्रभारी भगवान को चढाते है परशाद…

इसीलिए सिरगिट्टी थाना क्षेत्र इन दिनों कबाड़ व्यवसाईयों के लिए स्वर्ग बन गया है। इनकी संख्या क्षेत्र मे लगातार बढ़ती ही जा रही है। अधिकांश तौर पर इस व्यवसाय को संचालित करने वाले लोग मूलत: बाहर यानी कि अन्य प्रदेश से ताल्लुक रखते है। ऐसे लोगों के द्वारा ही इस क्षेत्र मे कबाड़ के व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा रहा है। आलम यह है कि सिरगिट्टी पुलिस इन पर नकेल कश नहीं पा रही है। कभी कभार खाना पूर्ति करने के लिए कुछ कबाड़ियों पर कार्यवाही कर देती है सिरगिट्टी क्षेत्र में कुकुरमुत्ता की तरह फैलते जा रहे हैं इन कबाड़ियों के व्यवसाय को लेकर क्षेत्र में चर्चा हो रही है कि साइकिल, मोटरसाइकिल, एवं अन्य लोहे कि सामग्री को के बेखौफ होकर धड़ल्ले से खरीद रहे हैं. मतलब यह कि व्यवसाय करने के लिए परमिसन विभाग से लेकर खरीदी अन्य वस्तु कि किया जा रहा है

नगर निगम के बाजार शाखा से अनुमति लेनी होती है
नगर निगम परिक्षेत्र पर कबाड़ का व्यवसाय करने वाले लोगो को निगम से अनुमति दिया जाता है। मामले पर विधि के जानकारो का कहना है कि निगम क्षेत्र पर कबाड़ का व्यवसाय करने वाले व्यक्ति को बाजार शाखा से व्यवसाय को संचालित करने के लिए अनुमति दिया जाता है लेकिन यह अनुमति पेपर, प्लास्टिक, पुठा खरीदी के लिए दिया जाता है. लेकिन कबाड़ संचालक इसकी आड़ में लोहा, टीना, तार, पीतल सभी तरह की सामग्री खरीद लेते हैं ऐसी स्थिति में क्रय किए गए अधिकांश सामग्रियों का बिल नहीं होता है इसके अलावा व्यवसाय को संचालित करने के लिए निगम क्षेत्र में होने के कारण इन्हें को गोमास्ता की भी आवश्यकता होती है और इन्हे जीएसटी बिल का भी उपयोग करना होता है. लेकिन इन सब नियमो का पालन नहीं किया जाता है.

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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