
बिलासपुर,,, सिम्स अस्पताल से महिला मरीज की मौत के बाद जमकर हुआ बवाल, दरअसल शहर के तारबहार क्षेत्र की 45 वर्षीय महिला ऋषि कौशल को उल्टी होने की वजह से परिजन जिला अस्पताल लेकर गए! वहां से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मरीज को सिम्स रेफर कर दिया गया! जिसके बाद परिजन मरीज को सिम्स अस्पताल लेकर गए! जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई! परिजनों का आरोप है!

कि सिम्स अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे समय पर सही इलाज नहीं दिया! घंटों तक उसे कोई देखने वाला तक नहीं आया! स्टाफ से मदद मांगने पर परिजनों के साथ दुर्व्यवहार भी किया गया! जब परिजनों ने मरीज को प्राइवेट अस्पताल में ले जाना चाहा तो डिस्चार्ज के पेपर भी नहीं बनाए गए! और लगातार हो रही देरी की वजह से मरीज की मौत हो गई! इसी बात को लेकर परिजनों से सिम्स में हंगामा भी किया! आपको बता दे सरकारी अस्पतालों में लापरवाही की चलते मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है! एक बार फिर सिम्स में हुई मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सकों पर आरोप लगाया!

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री और विभाग की लाख कोशिशें के बावजूद सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने का नाम नहीं ले रही। यही कारण है कि इन अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज करने की बजाय उन्हें मरने दिया जा रहा है। सामान्य बीमारियों में भी इलाज न होने के चलते मरीजो की मौत हो रही है। सिम्स में पहुंचने पर भी हालत नहीं बदले। मरीज की हालत बिगड़ती रही और उन्हें मेडिकल वार्ड नंबर 3 में भर्ती कर जिम्मेदारी पूरी कर ली गई। डॉक्टर झांकने तक नहीं आए और इलाज न होने की वजह से दोपहर 2:00 बजे मरीज की मौत हो गई। मरीज के परिजनों ने बताया कि वे रात से लेकर दोपहर तक E.C.G कराने की प्रतीक्षा कराते रहे! लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। पैसे ना देने पर मरीज का इलाज नहीं किया और यहां तक की निजी अस्पताल में भी नहीं ले जाने दिया। इसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सिम्स प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर, मरीज को देखने तक नहीं पहुंचे और बिना इलाज के ही उनकी जान चली गई।
यह कोई पहला मामला नहीं है! जब मरीज के परिजनों ने सिम्स और जिला अस्पताल के चिकित्सकों पर ऐसे आरोप लगाए हैं। डॉक्टर को तो भगवान का दर्जा दिया जाता है! जो मरीजों की जान बचाते हैं। जिला प्रशासन से लेकर प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा भी बार-बार इन चिकित्सकों की क्लास लेते रहे हैं! लेकिन फिर भी उसका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ रहा। यही कारण है! कि लोग सरकारी अस्पतालों को मौत का अड्डा मानने लगे हैं! जहां मरीज के पहुंचने पर उसकी जान जानी सुनिश्चित है। इस मामले में भी मिल रही शिकायतों की गहरी जांच जरूरी है ताकि किसी और मरीज की ऐसी असमय मौत ना हो।
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