
बिलासपुर,,, श्री पीताम्बरा पीठ, त्रिदेव मन्दिर, सुभाष चौक, सरकंडा, बिलासपुर में उक्त संतो के द्वारा पत्रकार वार्ता किया गया। जिसमे महामंडलेश्वर श्री सर्वेश्वर दास जी महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय संत समिति छत्तीसगढ़ (निर्वाणी अखाड़ा); अचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज “पीतांबरा पीठाधीश्वर” (अखिल भारतीय संत समिति धर्म समाज छत्तीसगढ़ प्रमुख); महंत नरेन्द्र दास जी महाराज राष्ट्रीय महामंत्री (निमर्मोही अखाड़ा); मंडलेश्वर दिव्यकांत दास जी महाराज प्रदेश प्रवक्ता (निर्मोही अखाड़ा); महंत राधेश्याम दास जी महाराज प्रदेश महामंत्री (निर्वाणी अखाड़ा), महंत, रामरूप दास जी महाराज जी सदस्य प्रदेश कार्यसमिति (दिगंबर अखाड़ा), महंत वेद प्रकाशाचार्य जी सदस्य प्रदेश कार्यसमिति (दिगंबर अखाड़ा) आदि।
आचार्य दिनेश जी महाराज “पीताम्बरा पीठाधीश्वर” अखिल भारतीय संत समिति धर्म समाज छत्तीसगढ़ प्रमुख ने कहा कि जीवन में सब कुछ प्राप्त हो यश, कीर्ति सुख, संतान, संपत्ति, साधन आदि सब चाहते है; परंतु विचार करें क्या हम ऐसा आचरण करते हैं सदगुरुदेव कहतें हैं किसी भी विषम परिस्थिति में जहां अधर्म हो रहा हो उसका विरोध करो अर्थात वाणी से शरीर बल से अथवा जो भी आप कर सकतें है करो। रामायण में जटायु जो पक्षी है उनके आचरण से सीखें रावण जब माता सीता को चुराकर ले जा रहा था जटायु ने विरोध किया जटायु जानते थे मै रावण से जीत नहीं सकता फिर भी विरोध किया अर्थात नारी के सम्मान उसकी रक्षा करना प्रत्येक सधर्मी का कर्तव्य है। जीव होने का अर्थ है अन्याय का विरोध जो आज की स्थिती में प्रत्येक सनातनी के लिए आवश्यक है। बंग्लादेश की घटनाओं से हमें सीखना होगा शाख में से आ की मात्रा घटानी होगी मानव मात्र के कल्याण हेतु।
महामंडलेश्वर सर्वेश्वर दास जी महाराज, अध्यक्ष अखिल भारतीय संत समिति छत्तीसगढ़ (निर्वाणी अखाड़ा) ने कहा कि टी.वी., सोशल मिडिया एवं प्रिंट मिडिया के माध्यम से लगातार प्राप्त हो रहे समाचारों से यह संज्ञान में आया है कि बंग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के पश्चात बंग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं के साथ टारगेट किलींग, लूटपाट, आगजनी महिलाओं के साथ जघन्य अपराध तथा मंदिर और धार्मिक स्थानों को भी क्षतिग्रस्त करने तोडने का प्रयास कर रहे हैं हिन्दू बाहुल्य ईलाकों के साठ से अधिक थाने बंद हैं किसी भी प्रकार की एफ. आई. आर नहीं लिखी जा रही है तथा बंग्लादेश की सेना के द्वारा भी अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ कोई अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है जिसके चलते बंग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यक हिन्दू कष्ट एवं वेदना सह रहे हैं यदि बंग्लादेश पडोसी देश भारत के साथ आपसी सहयोग की भावना नहीं रखता है तो ये इसकी निम्न बुद्धि का परिचायक है और आने वाले समय में इसका परिणाम उसे भोगना होगा। वर्तमान सरकार से अखिल भारतीय संत समिति का निवेदन है कि वहां से कोई भी हिन्दू भारत में प्रवेश चाहता है उन्हे तत्काल लाने का प्रयास किया जाए तथा उन्हें भारत की नागरिकता प्रदान किया जाए तथा विदेश मंत्रालय वहां की स्थिति का संज्ञान लेते हुए हिन्दुओं की सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था करें। अगर इस स्थिति को ही देखकर हम नहीं सुधरेंगे तो आने वाले भविष्य में हिन्दुओं के लिए कोई स्थान नहीं बचेगा तथा भारत को तत्काल हिन्दू राष्ट्र घोषित करना चाहिए।
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