
बिलासपुर,,, दिवाली, प्रकाश और मिठास का पर्व, पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्योहार के दौरान बाजारों में रौनक देखते ही बनती है, लेकिन इसके साथ ही कुछ स्वार्थी लोग अपनी तिजोरी भरने के चक्कर में आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते। दिवाली का समय आते ही नकली मिठाई और खोआ का धंधा जोर पकड़ने लगता है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडराने लगता है।
नकली मिठाइयों का बढ़ता कारोबार
दिवाली के समय मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ जाती है, और इसी मौके का फायदा उठाते हुए नकली खोआ और कैमिकल युक्त मिठाइयां बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। नकली खोआ बनाने के लिए डिटर्जेंट, स्टार्च और अन्य हानिकारक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो दिखने में असली लगता है लेकिन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक खतरनाक साबित होता है। इसके सेवन से पेट की समस्याएं, खाद्य विषाक्तता, लीवर और किडनी की बीमारी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
प्रशासनिक कार्रवाई और उसकी सीमाएं
हर साल त्योहारी सीजन में प्रशासन नकली मिठाइयों और खोआ पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चलाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि ये अभियान कभी भी समस्या की जड़ तक नहीं पहुंच पाते। मुनाफाखोर हर साल नए तरीकों से नकली उत्पाद बेचने का धंधा चलाते हैं, और प्रशासन की कार्रवाई का उन पर कोई खास असर नहीं होता। इस कारण बाजार में नकली मिठाइयां बेधड़क बिकती रहती हैं।
इस मुद्दे पर बिलासपुर के कलेक्टर अवनीश शरण ने विशेष कदम उठाए हैं। उन्होंने खाद्य एवं औषधि विभाग को आदेश दिया है कि मिठाई दुकानों और रेस्टोरेंट्स में अभियान चलाकर खाने-पीने की सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जाए। उन्होंने फूड सेफ्टी ऑफिसर और उनकी टीम को सख्त निर्देश दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। यह कदम बेहद सराहनीय है, लेकिन जब तक व्यापक स्तर पर जागरूकता और निरंतर निगरानी नहीं होगी, समस्या का समाधान कठिन है।
जनता की जागरूकता और सतर्कता
आम जनता की जागरूकता इस समस्या से निपटने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और मिठाइयां उन्हीं दुकानों से खरीदें जिन पर भरोसा हो। अत्यधिक सस्ती और आकर्षक दिखने वाली मिठाइयों से बचना चाहिए, क्योंकि वे अक्सर मिलावटी और नकली होती हैं। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से नकली उत्पादों की पहचान और उनके स्वास्थ्य पर दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सकती है
अंकुश लगाने के लिए प्रशासन को कठोर कदम उठाने होंगे। नियमित रूप से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करनी होगी और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी होगी। इसके साथ ही जनता को सतर्क रहना होगा और नकली उत्पादों से बचने के लिए सजगता बरतनी होगी।
दिवाली का असली आनंद तभी है जब हर व्यक्ति स्वस्थ और स्वच्छ खाद्य पदार्थों का सेवन कर सके। नकली मिठाइयों से न केवल सेहत को बल्कि समाज को भी खतरा है। प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयास से ही इस समस्या का समाधान संभव है।
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