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26 Jan 2026, Mon

आदित्य यादव: संघर्ष और समर्पण की प्रेरणा”

बिलासपुर,,, देवकीनंदन चौक के पास रहने वाले 11 वर्षीय आदित्य यादव का बचपन किसी सामान्य बच्चे के जैसे नहीं रहा! कोरोना महामारी के दौरान जब पूरी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल था! तब आदित्य की ज़िंदगी भी एक कठिन मोड़ पर आकर खड़ी हो गई! उनके पिता की असमय मृत्यु ने उनके परिवार को गहरे आघात में डुबो दिया! लेकिन इस छोटे से लड़के ने हार मानने के बजाय संघर्ष को अपना साथी बनाया!

कोरोना के कारण होने वाली आर्थिक तंगी और परिवार की जिम्मेदारी को देखते हुए आदित्य ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की मदद करने का जिम्मा उठाया! छोटे से आदित्य ने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर मेहनत और संकल्प हो, तो कोई भी मुश्किल राह नहीं रोक सकती! वह अपनी साइकिल पर घूम-घूमकर समोसे बेचते हैं! ताकि उनके परिवार की रोज़ी-रोटी चल सके!

आदित्य का यह संघर्षपूर्ण जीवन न सिर्फ उनके परिवार के लिए वरदान बनकर आया! बल्कि पूरे इलाके के लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गया है! आदित्य की ईमानदारी, परिश्रम और समर्पण ने उन्हें सिर्फ उनके गांव में नहीं, बल्कि पूरे इलाके में सम्मान दिलाया है! आज वह केवल एक छोटे बच्चे नहीं, बल्कि एक उदाहरण बन चुके हैं! कि कठिनाइयों के बावजूद अगर दिल में ठान लिया जाए! तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता!

आदित्य की यह कहानी न केवल उन बच्चों के लिए है! जो किसी न किसी कारणवश कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं! बल्कि यह उन सभी के लिए एक संदेश है! जो अपने सपनों और परिवार की खुशहाली के लिए कड़ी मेहनत करते हैं! आदित्य यादव की तरह अगर हम भी ईमानदारी और मेहनत के साथ अपने कार्यों को अंजाम दें! तो कोई भी मुश्किल हमें हमारे लक्ष्य से दूर नहीं कर सकती!

आदित्य यादव की कड़ी मेहनत, संघर्ष और अडिग संकल्प ने यह सिद्ध कर दिया है! कि छोटी उम्र में भी बड़े कार्य किए जा सकते हैं! और व्यक्ति की शक्ति उसकी स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी इच्छाशक्ति से निर्धारित होती है! वह सिर्फ एक उदाहरण नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक जीवंत प्रमाण बन चुके हैं!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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