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24 Jan 2026, Sat

स्मार्ट सिटी बिलासपुर के कलेक्ट्रेट में नहीं है व्हील चेयर की कोई व्यवस्था, घसीट-घसीट कर चलने को मजबूर दिव्यांग बुजुर्ग…

बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर में स्मार्ट सिटी की परिकल्पना के तहत विकास के कई प्रयास किए जा रहे हैं! पर शहर की सुंदरता और जनकल्याण के लिए लाखों करोड़ों की लागत से काम चल रहे हैं! लेकिन आज एक ऐसी स्थिति का सामना हुआ! जिसने सभी को हैरान और शर्मिंदा कर दिया! यह स्थिति बिलासपुर के कलेक्टर परिसर में देखने को मिली! जहां एक दिव्यांग बुजुर्ग व्यक्ति व्हील चेयर की कमी के कारण घसीटते हुए अपने काम से जुड़ी प्रक्रिया के लिए आया था!

दरअसल, बिलासपुर कलेक्टर ऑफिस परिसर में हर दिन सैकड़ों लोग विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए आते हैं! इनमें कई बुजुर्ग और दिव्यांग भी शामिल होते हैं! जो अपनी समस्याओं का समाधान लेने के लिए कलेक्टर के पास पहुंचते हैं! लेकिन आज कलेक्टर ऑफिस में एक बुजुर्ग दिव्यांग की हालत देखकर यह सवाल उठ रहा, कि क्या स्मार्ट सिटी की परिकल्पना केवल एक रूपरेखा तक सीमित रह जाएगी! जबकि आम आदमी के बुनियादी अधिकारों की अनदेखी की जा रही है?

बिलासपुर के करबला इलाके में रहने वाले जगदीश दिव्यांग बुजुर्ग कलेक्टर ऑफिस पहुंचे थे! ताकि वे आधार कार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर सकें! कलेक्टर के कार्यालय में उन्हें बताया गया कि आधार कार्ड के लिए चॉइस सेंटर पर जाना होगा! जब वह चॉइस सेंटर की ओर जा रहे थे! तो उन्हें कलेक्टर परिसर में व्हील चेयर की कोई व्यवस्था नहीं मिली! इसके बाद, उन्हें अपने शरीर को घसीटते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचना पड़ा! सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस कर्मचारी को उन्हें चॉइस सेंटर तक ले जाने के लिए भेजा गया था! उसने बुजुर्ग की मदद करने के बजाय सिर्फ यह कहकर छोड़ दिया कि “तुम्हें आधा घंटा लग जाएगा, तुम चलो, मैं आता हूं!

यह दृश्य न केवल बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय की असंवेदनशीलता को उजागर करता है! बल्कि यह भी दर्शाता है! कि स्मार्ट सिटी बनने के बावजूद, यहां के सरकारी दफ्तरों में दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद नहीं हैं! स्मार्ट सिटी का सपना तब तक अधूरा रहेगा जब तक इस प्रकार की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती! दिव्यांगों के लिए विशेष रूप से व्हील चेयर जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना बहुत जरूरी है! ताकि वे बिना किसी परेशानी के सरकारी दफ्तरों तक पहुंच सकें!

इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि जब सरकारी दफ्तरों में नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं! तो स्मार्ट सिटी के निर्माण के उद्देश्य पर सवाल उठते हैं! स्मार्ट सिटी का सपना तभी साकार हो सकता है! जब सभी वर्गों के नागरिकों को एक समान और समुचित सेवाएं प्रदान की जाएं, चाहे वे बुजुर्ग हों या दिव्यांग!

अब यह जिम्मेदारी प्रशासन की बनती है! कि वे इस मामले पर तुरंत ध्यान दें और कलेक्टर परिसर सहित सभी सार्वजनिक कार्यालयों में दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए व्हील चेयर जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करें! स्मार्ट सिटी का सपना केवल आधुनिकतम तकनीकी विकास और सौंदर्यीकरण में नहीं, बल्कि हर नागरिक की आवश्यकता को पूरा करने में निहित है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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