
सुकमा/जगदलपुर/रायपुर,,, छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के बढ़ते कदम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी हैं! ताजे मामले में सुकमा के डीएफओ (जिला वन अधिकारी) अशोक कुमार पटेल को 4 साल बाद निलंबित किया गया है! इन पर आरोप है! कि उन्होंने आदिवासी तेंदूपत्ता श्रमिकों का बोनस, जो लगभग 6.5 करोड़ रुपये की रकम थी! जिसको हड़प लिया था! इस भ्रष्टाचार के मामले में सरकार के तत्कालीन कदम से जहां एक ओर नौकरशाही में हड़कंप मचा है! तो वहीं कई सवाल भी उठ रहे हैं! कि आखिर क्यों इस मामले की जांच और कार्रवाई में इतने सालों का समय लग गया?


यह मामला 2021 का है! जब सुकमा जिले में तेंदूपत्ता श्रमिकों के लिए निर्धारित बोनस की राशि कागजों में ही वितरित कर दी गई थी! जबकि वास्तविकता में संग्राहकों को यह राशि नहीं दी गई थी! आदिवासी श्रमिकों ने इस पर तुरंत शिकायत की थी! लेकिन जांच रिपोर्ट लगभग 4 साल तक सरकारी फाइलों में दबी रही! अब जाकर राज्य सरकार ने आरोपी डीएफओ को निलंबित किया है!

आरोप है! कि इस घोटाले में सुकमा के डीएफओ ने लगभग 2 करोड़ रुपये हड़प लिए थे! और इस राशि का वितरण आदिवासी श्रमिकों को नहीं किया गया! इसके अलावा, सुकमा जिले में तेंदूपत्ता बोनस वितरण की प्रक्रिया में कई अन्य अनियमितताएं भी सामने आईं थीं! इस मामले की जांच के दौरान यह भी पाया गया कि डीएफओ अशोक कुमार पटेल पर पहले भी कई घोटाले थे! जिनमें खाद्य घोटाले और अन्य योजनाओं में गबन के आरोप थे!

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दावा करने वाली राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं! विशेष रूप से, जब यह मामला कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू हुआ था! तो उसे त्वरित रूप से नहीं सुलझाया गया! इसके बावजूद, बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद भी इस मामले में जांच में देरी हुई! आरोप है! कि वन और जलवायु विभाग के अधिकारियों ने इस मामले को लापरवाही से हैंडल किया! और इस भ्रष्टाचार की जांच को लंबित रखा!

अधिकारियों के इस सुस्त रवैये ने न केवल आदिवासी तेंदूपत्ता श्रमिकों को नुकसान पहुंचाया, बल्कि सरकार की छवि को भी दागदार किया! भ्रष्ट अफसरों के संरक्षण के कारण आदिवासी बाहुल्य इलाकों में सरकारी योजनाओं का लाभ पीड़ितों तक नहीं पहुंच सका! इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है! और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है!
अब राज्य सरकार ने सुकमा के डीएफओ अशोक कुमार पटेल को निलंबित कर दिया है! और उनके स्थान पर बीजापुर के डीएफओ राम कृष्णा को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है! हालांकि, सवाल यह है! कि 4 साल बाद इस मामले में कार्रवाई क्यों की गई और इससे पहले क्यों अधिकारियों ने इसकी गंभीरता को नजरअंदाज किया?
इस पूरे मामले से यह स्पष्ट हो गया है! कि छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं! और मुख्यमंत्री साय के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है! कि वे अपनी सरकार के कार्यकाल में इस तरह के मामलों पर सख्त नियंत्रण रखें!
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