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21 Jan 2026, Wed

मित्तल फर्नीचर में हुई 2 मौतों के बाद मोपका सब स्टेशन में 24 घंटे से दहक रही आग, फायर सेफ्टी का दावा फेल दमकलों का निकला दम…

00 देर रात तक धधकती रही सबस्टेशन के पावर ट्रांसफार्मर से आग…
00  मित्तल फर्नीचर में हुई मौत और जानमाल की हानि का जिम्मेदार कौन…
00 पानी भरने लगाते रहे कुदुदंड पम्प हाउस से मोपका तक दौड़..
00 जगह- जगह जाम के कारण फंसती रही फायर ब्रिगेड…


बिलासपुर,,, जिले भर को फायर सेफ्टी का प्रमाण पत्र बाटने वाला नगर सेना का फायर सेफ्टी विभाग खुद कितना सेफ है! और उसके भरोसे शहर कितना सेफ है! आप खुद सोचिए, दोपहर 2 बजे मोपका के सब स्टेशन के ट्रांसफार्मर में लगी आग देर रात तक नही बुझाई जा सकी… क्योकि 10 हजार लीटर से ज्यादा ऑयल होने के कारण आग की लपटों से धधक रहे ट्रांसफार्मर को लगातार पानी के धार की जरूरत है! पर बैट्री खराब होने के कारण 12 हजार लीटर वाला दमकल पम्प हाउस में कंडम होते खड़ी है! 6-6 हजार लीटर वाले 4 दमकल कुदुदंड पम्प हाउस से मोपका तक शहर के सड़को के ट्रैफिक को चीरते 10 किलोमीटर का फेरा लगाते रहे… इसी के चलते सिरगिट्टी के मित्तल फर्नीचर में हुई आगजनी में दो लोगो की मौत हो गई! आखिर इसका जिम्मेदार है कौन…?


उम्मीद थी! कि नगर निगम से नगर सेना के अधीन आने के बाद फायर ब्रिगेड के सिस्टम में सुधार और बदलाव आएगा… लेकिन हकीकत ये है! कि यदि कही आगजनी हुई तो नगर सेना का भरोसा करना गलत होगा! आप खुद देखिये 12 हजार लीटर वाली दमकल वाहन सिर्फ इसलिए खड़ी है! कि बैट्री ठप है!


विभाग भले बदल गया पर माहौल नहाए क्या और क्या निचोड़े टाइप है! क्योकि नगर सेना के पास हस्तांतरण के 4-5 साल बाद न तो खुद का सब स्टेशन है! न हाइड्रेंट नतीजतन नगर सेना का फायर ब्रिगेड अब भी निगम के पम्प हाउस परिसर में खड़ी होती है! यही से पानी भरकर दौड़ती है! स्टाफ अभी भी बिना प्रशिक्षण के अपनी जान जोखिम में डाल आग बुझा नगर सेना को कोस रहा!

7 दमकल, 1 ठप, 1 हाईकोर्ट…


15 पंचायतों और 3 निकायों के बिलासपुर शहर में शामिल होने के बाद शहर का दायरा बढ़ गया… आबादी बढ़कर करीब 6 लाख के आसपास हो गई और न्यायधानी की इतनी बड़ी आबादी को आगजनी और किसी तरह की अनहोनी से बचाने के लिए केवल 7 दमकल है! 6 बड़ी और 1 छोटी, इनमें से 1 बैट्री ठप होने और ब्रेक शु घिसने के कारण 1 कंडम होते पड़ी है! जो दुगनी क्षमता 12 हजार लीटर की है! दूसरा हाईकोर्ट में है! 1 छोटी है! शेष जो 4 है! वो 6-6 हजार लीटर की है! जो प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण शहर में आगजनी होने पर आगजनी स्थल से कुदुदंड पम्प हाउस तक सिर्फ पानी लाने दौड़ लगाती है! और इनमें से कुछ दमकल लीकेज भी है! जिससे कई लीटर पानी मौके तक पहुँचते व्यर्थ बह जा रहा ये हकीकत है! न्यायधानी के फायर सिस्टम का…?

क्यो नही लेते सहयोग…

कही भी आगजनी होने पर उस इलाके के बड़े बिल्डिंगस काम्प्लेक्स के सिस्टम से पानी का प्रबंध होना चाहिए..  ताकि, आग पर लगातार पानी डाल आग को बुझाया जा सके ताकि किसी तरह के जनधन की हानि न हो… इसी शर्त पर भवन निर्माण की अनुमति और फायर सेफ्टी विभाग द्वारा फायर सेफ्टी का प्रमाण पत्र दिया जाता है! यही वजह है! कि तमाम बड़ी बिल्डिंगों और कॉम्प्लेक्स के बाहर फायर ब्रिग्रेड को भरने दो प्वाइंट दिया जाता है! ताकि आगजनी व आपातकाल में उनसे मदद ले सके दमकल भर जा सके… इसके बाद भी ऐसे संकटकालीन स्थिति में बड़े काम्प्लेक्स, होटल से पानी क्यो नही लेते ये समझ से परे है!

नर्मदा कोल्डड्रिंक्स के फायर सेफ्टी का ये हाल…

सिरगिट्टी के मित्तल फर्नीचर में हुई आगजनी में दो जाने चली गई… जबकि यहाँ फैक्ट्रियां है! एक नही कईं कईं पम्प चल रहे… लेकिन जब दमकल पानी भरने के लिए यहां के नर्मदा कोल्डड्रिंक पहुची तो फायर सेफ्टी के लिए दिये गए पॉइंट में प्रेशर नही था! पानी स्लो चलने की वजह से भरने में विलंब हुआ! पर बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया कि जब इतने बड़े कोल्डड्रिंक्स प्लांट के फायर सेफ्टी का ये हाल है! तो फायर सेफ्टी विभाग कैसे परचून की दुकान की तरह फायर सेफ्टी विभाग प्रमाण पत्र बांट रहा और कैसी मोनिटरिंग कैसा निरीक्षण कर रहा! आखिर आये दिन हो रहे आगजनी में हो रहे लाखो करोड़ो के नुकसान और जा रही निर्दोषों की जान का दोषी क्या कोई नही है! वो भी इन तमाम फाल्ट के सामने आने के बाद भी…!


अब तक 25-30…


ये तस्वीर रात 10 बजे मोपका सब स्टेशन के पॉवर ट्रांसफार्मर से धधक रही आग की है! बताया गया कि दोपहर करीब 2 बजे आग लगी तब से रात 10 बजे तक आरसमेटा, कोरबा और सीपत एनटीपीसी, माडवा पॉवर प्लांट के फायर ब्रिगेड से 25 से 30 दमकल पानी डाला जा चुका है! अंदर कम से कम 10 हजार लीटर ऑयल भरा है! जिसमे कंटीन्यू पानी डालने से ही आग पर काबू पाया जा सकता है! नही तो आग का बुझना मुश्किल है…!

कलेक्टर – एसपी ने लिया जायजा, एमडी भी सम्पर्क में…

कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसपी रजनेश सिंह ने रात में आगजनी स्थल का जायजा लिया… विद्युत वितरण कम्पनी के एमडी भी मातहत अफसरों को कॉल कर अपडेट लेते रहे नतीजतन चीफ इंजीनियर एके अम्बष्ट और पूरा अमला मौके पर ही डंटा रहा…


लेनदेन का आरोप…

न्यूज बास्केट ने एक निजी हॉस्पिटल संचालक से फायर सेफ्टी के हाल को लेकर चर्चा की तो उन्होंने कहा कि ज्यादातर हॉस्पिटल का फायर सिस्टम ठप है! सब लेनदेन का खेल है! इससे आग पर काबू पाना सम्भव नही हिम्मत है! तो टेस्टिंग करा लें सच्चाई सामने आ जायेगी!

होना क्या चाहिए…

0 बड़े भवनों में लगे फायर सेफ्टी उपकरणों की समय समय पर जांच होनी चाहिए।

0 आगजनी पर तत्काल काबू करने शहर के चारो दिशाओं में दमकल को पानी भरने के लिए हाइड्रेंन कि व्यवस्था बनानी चाहिए। ताकि तत्काल पानी सुलभ हो, दमकल जाम में न फसे
0 आगजनी होने पर आसपास के बड़े काम्प्लेक्स और होटलों से दमकल में पानी भरने की व्यवस्था करना चाहिए। ताकि आसपास से ही भड़कती आग पर डालने के लिए पानी का इंतेजाम हो सके।

जिम्मेदार कौन…

शहर में लगातार हो रही आगजनी को लेकर कुछ घटनाओं पर सन्देह है! तो कुछ सवाल कर रहे कि फायर ब्रिगेड और फायर सेफ्टी का इंतजाम किस काम का जब करोड़ो की क्षति हो रही और लोगो की जिंदा जलकर मौत हो रही आखिर इस जानमाल की क्षति का क्या कोई जिम्मेदार है! कि सब अज्ञात में निबटा ढिया जाएगा…!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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