
रायपुर,,, छत्तीसगढ़ की राजधानी में जन औषधि केन्द्रों और अस्पताल सप्लाई के नाम पर दवाइयों के कारोबार में बड़ा घोटाला सामने आया है! प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने इस मामले को गंभीर बताते हुए देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की है! आरोप है! कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए हर साल करीब 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा की जीएसटी और आयकर चोरी की जा रही है!
1…फर्जी सप्लाई के नाम पर दवाइयों का खेल…
2.. हॉस्पिटल के नाम पर सस्ते में खरीद, बाजार में बिना बिल बिक्री…
मामले में आरोप है! कि बड़े अस्पतालों और सार्वजनिक उपक्रमों के नाम पर दवा कंपनियों से भारी छूट पर दवाइयां खरीदी जाती हैं!उदाहरण के तौर पर 100 रुपए की दवा को 30 से 40 रुपए में लिया जाता है! इसके बाद वही दवाइयां खुले बाजार में 70 से 80 रुपए में बिना बिल के बेची जाती हैं! इस पूरी प्रक्रिया में सरकार को मिलने वाला जीएसटी सीधे तौर पर चोरी हो रहा है!
यह खेल केवल छोटे स्तर तक सीमित नहीं है! बल्कि बड़े अस्पतालों और संस्थानों के नाम पर फर्जी क्रय आदेश तैयार कर दवाइयों की सप्लाई दिखाई जाती है! जिन संस्थानों के नाम सामने आए हैं! उनमें बालको हॉस्पिटल, एनटीपीसी हॉस्पिटल, एसईसीएल, भिलाई स्टील प्लांट, सीएसईबी, ईएसआईसी और एनएमडीसी जैसे बड़े उपक्रमों के अस्पताल शामिल बताए जा रहे हैं!
प्रदेश में लंबे समय से दवा कंपनियों, व्यापारियों और कुछ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से यह घोटाला चल रहा है! इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है!
ननकीराम कंवर…
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है! कि जीएसटी विभाग और ड्रग कंट्रोल ऑफिस के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा है! फर्जी ऑर्डर के जरिए हर साल 1000 से 1200 करोड़ रुपए की दवाइयां रियायती दर पर निकाली जाती हैं! और फिर बाजार में खपाई जाती हैं!
इस पूरे मामले में कई बड़ी दवा कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं! जिनमें एबॉट इंडिया, बायोकॉन, रैनबैक्सी, मैनकाइंड, सिप्ला, सन फार्मा, डॉ. रेड्डी लैब, अल्केम, टोरेंट फार्मा और जायडस जैसी कंपनियां शामिल बताई जा रही हैं! हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी…
हर साल हजारों करोड़ की टैक्स चोरी का आरोप…
केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग तेज…
आरोप है! कि अस्पतालों के वास्तविक बजट से कई गुना ज्यादा दवाइयों के फर्जी ऑर्डर बनाए जाते हैं! इसके जरिए कंपनियों से दवाइयां सस्ते में निकालकर खुले बाजार में खपाई जाती हैं! इससे न सिर्फ सरकार को भारी राजस्व नुकसान हो रहा है! बल्कि मरीजों तक पहुंचने वाली दवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं!
फिलहाल पूरे मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की मांग की गई है! अगर आरोप सही पाए जाते हैं! तो यह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े फार्मा और टैक्स घोटालों में से एक हो सकता है! अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है! और दोषियों पर कब तक शिकंजा कसता है!
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