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21 May 2026, Thu

कुर्सी बचाओ या मरीज भगाओ? जिला अस्पताल बना ‘रेफरल सेंटर’, इलाज अंदर कम, बाहर ज्यादा डॉक्टरों पर कमीशन का खेल, प्रशासन मौन गरीब मरीजों की जेब पर डाका, सिस्टम पर भरोसा सवालों के घेरे में…

बिलासपुर,,, जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं! मामला अब सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं रहा… बल्कि पूरे सिस्टम की नीयत पर संदेह जताया जा रहा है!आरोप है! कि रिटायरमेंट के बाद भी एक डॉक्टर का प्रभाव बना हुआ है! और उसी के भरोसे अस्पताल की व्यवस्था संचालित की जा रही है! इससे यह आशंका गहराती है! कि हालात स्वाभाविक नहीं बल्कि सुनियोजित हो सकते हैं!
सबसे बड़ा सवाल यह है! कि क्या प्रशासन को पहले से मेडिसिन विशेषज्ञ की कमी का अंदेशा नहीं था..! या जानबूझकर स्थिति को इस स्तर तक पहुंचने दिया गया? सरकारी अस्पताल, जहां गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त व बेहतर इलाज मिलना चाहिए… वहीं से उन्हें निजी अस्पतालों में रेफर करने के आरोप बेहद चिंताजनक हैं!
सूत्रों के मुताबिक, जिन मरीजों का इलाज जिला अस्पताल में संभव है! उन्हें भी बाहर भेजा जा रहा है! यदि इसमें कमीशन या निजी लाभ की मंशा शामिल है! तो यह न केवल अनैतिक है! बल्कि मरीजों के अधिकारों का सीधा उल्लंघन भी है! संबंधित डॉक्टर पर पहले भी निजी अस्पतालों से जुड़े होने और सेवा के दौरान प्राइवेट प्रैक्टिस करने के आरोप लग चुके हैं!
इसके अलावा, सिविल सर्जन पद पर रहते हुए नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस लेने और साथ ही निजी प्रैक्टिस जारी रखने जैसी बातें भी चर्चा में रही हैं! बाद में इस अलाउंस को छोड़ना संदेह को और गहरा करता है!
प्रशासन की चुप्पी और अब तक कार्रवाई का अभाव पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है! अब जरूरत है! निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला अव्यवस्था का है! या किसी बड़े खेल का जिसकी कीमत आम जनता चुका रही है!

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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