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21 Jul 2026, Tue

‘नागलोक’ का महाघोटाला! 13 गिरफ्तार, साहब का ड्राइवर बना मास्टरमाइंड, डॉक्टर-रीडर-वकील भी शिकंजे में; अब सवाल—क्या बड़े अफसर बच रहे हैं, छोटे कर्मचारी बन रहे बलि के बकरे?…

,,, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के विधानसभा में न्यायधानी को नागलोक बना मरी का माल खाने वालों का मुद्दा उठा खदबर्रो मचा दिया है। हरकत में आई बिलासपुर पुलिस ने 17 में से 16 मामले दर्ज कर सिम्स की पूर्व डॉक्टर, तहसील कार्यालय के 3 रीडर और एसडीएम साहब के ड्राइवर समेत 13 आरोपियो को गिरफ्तार करने का दावा किया है। एसएसपी रजनेश सिंह की माने तो अभी तक पुलिस और तहसील कार्यालय के अफसरो का मामले में डायरेक्ट इन्वलमेंट नही पाया गया है। तो फिर सवाल यह उठ रहा कि साहब का ड्राइवर पर मास्टरमाइंड होने का दावा कैसे। क्या निगम के डेलीवेजेस कर्मचारी का इतना साहस है कि वो इतना बड़ा चक्रम चला सके।

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि जांच में एक मामले में फर्जीवाड़ा नही बल्कि नेकलीजेंसी सामने आई है। ये सारे मामले 2019 से फरवरी 2024 के बीच के बताए जा रहे।

रेड में मिले महत्वपूर्ण साक्ष्य

एसएसपी श्री सिंह ने बताया कि जांच के दौरान 11- 12 आरोपियो के ठिकानों पर दबिश देकर महत्वपूर्ण दस्तावेज, फर्जी सील, डायरी, खुलवाए गए फर्जी खातों और इनमें हुए ट्रांजेक्शन, किसका कितना हिस्सा सब का लेखाजोखा मिला है।

नगर सैनिक और साहब का ड्राइवर अहम किरदार

एस्एसपी श्री सिंह ने बताया कि पूरे फर्जीवाड़े के खेल में ड्राइवर और नगर सैनिक के अहम रोल होने की बात सामने आई है। नगर सैनिक ही मरचुरी में बॉडी आने पर वकीलों और इस खेल में शामिल किरदारों को फोन कर सूचना देता था, सूचना पर ये लोग पहुंचकर मृतक के परिजनों को 50 हजार दिलाने का लालच दे स्क्रिप्ट बताते थे कि मौत का कारण सर्पदंश बताना है। उन्होंने बताया कि
अभी तक डॉक्टर प्रियंका,ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा, अधिवक्ता हीरा खांडेकर अधिवक्ता वस्त्रकार, अधिवक्ता कांता साहू, मुंशी मनहर, बैंक कर्मी आशीष कुमार और एक और डॉक्टर का नाम सामने आया है, दूसरा डॉक्टर फरार है।

9-10 हजार मेहनताना, ट्रांजेक्शन 5 लाख

एसएसपी ने बताया कि अभी तक कि जांच में ये बात सामने आई है कि ड्राइव्हर गोविंद तय करता था कि किसका कितना हिस्सा होगा उसी हिसाब से बंटता था, उसके भी प्रमाण मिले है। ड्राइवर के खाते में तो 5 लाख का ट्रांजेक्शन होना पाया गया है। साहब को जो ड्राइवर निगम से मिला है वह ठेकेदारी में है उसका मेहनताना 10- 12 हजार से ज्यादा नही होगा और निगम के ठेका कर्मियों को वेतन कैसे और कितने दिन नही महीने में मिलता है ये भी सबको पता है फिर साहेब के ड्राइवर के खाते में 5 लाख रुपये कैसे आये ये बड़ा सवाल है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डॉक्टरी पेशे की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह

इस फर्जीवाड़े ने डॉक्टरी पेशे और सरकारी हॉस्पिटलों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिये है कि तो क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी बिकते है।

और मच गया पोल खोल ब्लंडर

इधर जिले बहुचर्चित सर्पदंश प्रकरण में एसडीएम कार्यालय के रीडर नरेंद्र कौशिक, तहसील कार्यालय के रीडर हरिशंकर राठौर और गरीब बिंझवार को गिरफ्तार कर जेल भेजने को लेकर बवाल मचा है। सोमवार को इनकी गिरफ्तारी के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी के नेतृत्व में कर्मचारियों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए । अध्यक्ष रोहित तिवारी ने कहा कि सर्पदंश मुआवजा प्रकरण किसी एक कर्मचारी के स्तर पर तय नहीं होता। इसकी पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पुलिस पंचनामा, चिकित्सकीय पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पटवारी के प्रतिवेदन, तहसीलदार और एसडीएम के परीक्षण के बाद आगे बढ़ती है। अंतिम निर्णय सक्षम राजस्व अधिकारियों के स्तर पर लिया जाता है, जबकि लिपिक केवल कार्यालयीन प्रक्रिया का निर्वहन करते हैं। ऐसे में केवल लिपिकों की गिरफ्तारी करना जांच की निष्पक्षता और पूरे प्रकरण पर बड़ा सवाल है, उन्होंने कहा कि प्रकरण से जुड़े अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को वाकओवर क्यो उनकी भी भूमिका की जांच होनी चाहिए ताकि पूरी सच्चाई सामने आए क्योकि कर्मचारी तो साहब के आदेश पर काम करते है। संघ ने कर्मचारियों में असंतोष और असुरक्षा के माहौल का हवाला दे पूरे मामले की निष्पक्षता से जांच करा छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा न बनाने की बात कही।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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