
बिलासपुर,,, जिले में अलग अलग जगहों पर चल रहे कोचिंग सेंटरों को जिले के कलेक्टर ने समिति गठित कर सभी कोचिंग सेंटर्स के जांच के निर्देश दिए है! ये 5 सदस्यीय टीम S.D.M के नेतृत्व में शहर के अलग अलग कोचिंग संस्थानों में जाकर निरीक्षण कर रही है! और कमियां पाए जाने पर निगम की ओर से संचालकों को नोटिस भी दिया जा रहा है! अगर समय रहते समस्याओं को दूर नहीं किया गया!

तो कोचिंग संस्थानों पर गंभीर और बड़ी कार्रवाई की जा सकती है! जांच के दौरान हमारे मीडिया टीम ने A.D.M से बातचीत की आपको बता दे कि जिले में तेजी से एजुकेशन हब का रूप ले रहा है। पीएससी सहित तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हजारों की संख्या में स्टूडेंट शहर आ रहे हैं। शहर में छोटे-बड़े लगभग 500 से अधिक कोचिंग सेंटर फल फूल रहे हैं। लाखों की फीस लेने वाले कोचिंग संस्थान नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रहे हैं। कोचिंग सेंटर में फायर सेफ्टी जल भराव जैसी आपदाओं से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध नजर नहीं आता।

यहां भी आपदा प्रबंधन के मानकों को ध्यान में नहीं रखा गया है। दिल्ली के एक कोचिंग के बेसमेंट में पानी भरने से यूपीएससी की तैयारी कर रहे तीन होनहार की मौत ने एक बार फिर से व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है की कोचिंग में मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। इस घटना के बाद अब शहर में चल रहे सैकड़ों कोचिंग सेंटर में अपना भविष्य बनाने पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए है। बिलासपुर की बात करें तो पिछले एक दशक में यह एजुकेशन हब के रूप में तेजी से उभारा है। यहां अफसर, डॉक्टर, इंजीनियर बनने का सपना लेकर संभाग भर के शहर और गांव से स्टूडेंट आ रहे हैं।
पीएएससी, एसएससी सहित विभिन्न भर्ती परीक्षा के अलावा नीट JEE, PET, PMT जैसी प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र शहर का रुख रहे हैं। कोचिंग के क्षेत्र में संभावना को देखते हुए अब यह बिजनेस का रूप लेता जा रहा है। अब हर महीने कोई ना कोई नया संस्थान खुल रहा हैं, लेकिन यहा सुविधा के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता, पार्किंग में ही कक्षाएं और ऑफिस संचालित हो रहे हैं। कोचिंग संचालक मकान मालिक को दोषी ठहरा रहे हैं तो वही मकान मालिक व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कह रहे हैं।
कई कोचिंग संस्थान तंग गलियों और बहू मंजिला भवनों की तीसरी चौथी मंजिल पर चल रही है। जहां, किसी भी आपात स्थिति में राहत पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं, अधिकांश कोचिंग संस्थान व्यवसायिक भवनों में चल रहे हैं लेकिन इनमें कोचिंग संस्थान के लिए तय नियमों की सीधे-सीधे अनदेखी की जा रही है। इतना ही नहीं संबंधित विभागों को यह भी नहीं पता है कि किस भवन में कौन संस्थान चल रहा है, इन भवनों में कोचिंग संस्थान चलाने के लिए अतिरिक्त जरुरी प्रबंध नहीं किए गए हैं। शहर में स्थित कोचिंग संस्थान ऐसे स्थानों पर है जहां आपात स्थिति में दमकल वाहन को ले जाना तो दूर एक साथ दो लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल है। ऐसे में बिलासपुर में भी चलने वाले कोचिंग सेंटर में दिल्ली जैसे हादसे की आशंकाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।
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