Breaking
21 Jan 2026, Wed

सेना के लिए आरक्षित जमीन में अवैध खनन जोरो पर अवैध खनन को लेकर महिला नेत्री का नाम आया सामने….

बिलासपुर,,, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में खनिज के अवैध उत्खन परिवहन पर एक तरफ जहां विभाग कार्रवाई कर अपनी पीठ को थफथपा रहा है! तो वहीं दूसरी और राजनीतिक सरंक्षण में चल रहे जमकर अवैध उत्खनन का काम भी जोरो पर है! आपको बताते चले कि सूत्रों मिली जानकारी के अनुसार अति सवेदनशील एयरपोर्ट से लगी रक्षा मंत्रालय की जमीन जो सेना के आरक्षित की गई थी उस जमीन पर करोडो रूपय के मुरूम की अवैध खुदाई के मामले मे चौकाने वाला खुलासा हुआ है।

रात भर मुरुम, मिट्टी की खुदाई चल रही है मौके पर मौजूद जेसीबी के चालको के कबूलनामे के अनुसार क्षेत्र की महिला नेत्री बेखौफ इस काम को अंजाम दे रही है जिसे एक बड़े नेता का संरक्षण मिला हुआ है यही वजह है की तमाम शिकायतों के बाद भी कार्रवाई के लिए खनिज राजस्व सहित पुलिस प्रशासन के हाथ काँप रहे है । दो दर्जनों हाइवा के साथ करीब आधा दर्जन जेसीबी के साथ सेना की जमीन की बेदर्दी से खुदाई मे एक ड्राइवर ने दुर्गा कौशिक और किसी बबलू सिंह के नाम का खुलासा भी किया है।

वही इस मामले मे महिला नेत्री दुर्गा कौशिक ने अपना पक्ष रखते हुए बताया की उसने इसके लिए खनिज विभाग से अनुमति ली हुई है । बातचीत मे महिला नेत्री का कहना है की यहाँ रात भर और और लोग भी खुदाई करते है । वही खनिज विभाग से मिली जानकारी के अनुसार दुर्गा कौशिक को रायल्टी पर्ची अभी कुछ दिनों पहले ही जारी की गई है अब पूरे मामले की जांच कर अनुमति दिये गए क्षेत्र का सीमांकन किया जायेगा।

वही सुत्रो की माने तो जिस खसरे नंबर की जमीन पर खनन की अनुमति दी गई है वहाँ पानी भरा हुआ है जहा से मुरुम निकलाना असंभव है और रायल्टी पर्ची की आड मे बडे नेताओ के संरक्षण मे आसपास मौजूद सेना की जमीन से करोडो रू की मुरुम मिट्टी निकालकर कर इलाके मे बन रही वैध, अवैध कालोनियों मे इनका इस्तेमाल किया गया है। कालोनियों के संचालक के इस्तेमाल की गई मुरुम की रायल्टी पर्ची भी नही है तमाम जानकारी होने के बाद भी खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने इन कालोनियों की जांच करना भी मुनासिब नही समझा पास जिसकी जांच भी जरूरी है।
गौरतलब है की रक्षा मंत्रालय की जमीन पर अवैध खुदाई पर मीडिया की खबरों को स्वतः संज्ञान लेते हुए नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे रहते हैं और यह केवल गांववालों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे कुछ बड़े लोग भी हैं। यह मामला बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट, चकरभाठा के पास स्थित रक्षा मंत्रालय की जमीन पर मुरूम की अवैध खुदाई से जुड़ा है। कोर्ट ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लिया।

मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायाधीश रविंद्र अग्रवाल की विशेष बेंच ने राज्य सरकार और रक्षा मंत्रालय से शपथ पत्र में जवाब देने को कहा। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने गूगल मैप के माध्यम से यह तर्क पेश किया कि 2012 से उस स्थान पर गड्ढा था, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए कहा कि गूगल पर हमेशा विश्वास नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए नोटिस में देरी पर नाराजगी जताई और बताया कि इस खनन में राज्य को करोड़ों रुपए की रॉयल्टी का नुकसान हुआ है।
अगली सुनवाई 9 जनवरी 2025 को निर्धारित की गई है, जब राज्य सरकार और रक्षा मंत्रालय से शपथ पत्र पर जवाब की उम्मीद की जा रही है।

Author Profile

प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
Latest entries

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You Missed