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7 Mar 2026, Sat

नये साल के जश्न में बिलासपुर वासी गटग गए करोड़ की शराब,, पिछले साल के रिकार्ड को भी तोड़ दिया…

बिलासपुर,,,,नए साल के आगमन को लेकर देशभर में उत्साह और उल्लास का माहौल देखा गया! छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर में भी नए साल का जश्न बेहद शानदार तरीके से मनाया गया! इस अवसर पर, लोगों ने नए साल की खुशियों को शराब के जाम के साथ मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी! प्रदेशभर में शराब की बिक्री ने रिकॉर्ड तोड़ा, और बिलासपुर में यह आंकड़ा चौंकाने वाला था! यहां, 1 जनवरी को शराब की बिक्री 8 करोड़ 69 लाख रुपये तक पहुंच गई! जो कि एक संकेत था! कि नए साल का उत्साह शराब प्रेमियों के बीच जबरदस्त था!

हालांकि, 31 दिसंबर का दिन मंगलवार था! जो कि अधिकांश लोगों के लिए एक कार्यदिवस था! इस वजह से शराब प्रेमियों के बीच निराशा का माहौल था! चूंकि मंगलवार को शराब की बिक्री में उतनी अधिक बढ़ोतरी नहीं हो पाई थी! लेकिन लोग 1 जनवरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे! नए साल के पहले दिन छुट्टी होने के कारण शराब प्रेमियों को अधिक समय और अवसर मिला, और उन्होंने इस दिन अपनी निराशा को पूरी तरह से दूर कर लिया!

1 जनवरी को बिलासपुर में शराब की बिक्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई! और लोग नए साल की शुरुआत को शानदार तरीके से मनाने के लिए शराब का आनंद लेने लगे! इस दिन, शराब की बिक्री ने 8 करोड़ 69 लाख रुपये का आंकड़ा छुआ! जो कि इस दिन के लिए एक नया रिकॉर्ड था! यह दर्शाता है! कि लोग नए साल के जश्न में पूरी तरह से डूबे हुए थे!

बिलासपुर में शराब के अलावा अन्य मनोरंजन के साधन भी थे! लेकिन शराब की बिक्री की जो बात सबसे प्रमुख रही, वह यह थी! कि नए साल के जश्न में लोग अधिक से अधिक शराब खरीदने के लिए तैयार थे! इस दौरान, कुछ लोग इस जश्न में अपनी सीमाएं पार कर गए! जिससे शराब बिक्री का आंकड़ा इतनी बड़ी मात्रा में पहुंचा!

नए साल का जश्न हर किसी के लिए खास होता है, लेकिन शराब की बिक्री की बढ़ोतरी यह भी दर्शाती है कि लोग अपने उत्सवों को और भी यादगार बनाने के लिए इसे एक प्रमुख हिस्सा मानते हैं। हालांकि यह शराब प्रेमियों के लिए खुशी का कारण हो सकता है, वहीं समाज के लिए यह सोचने का समय भी है कि इस प्रकार की शराब की बिक्री का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।

कुल मिलाकर, बिलासपुर में नए साल का जश्न उमंग और उत्साह से भरपूर रहा, और शराब की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी ने इस उत्सव को और भी रंगीन बना दिया।

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प्रधान संपादक -हरबंश सिंह होरा
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