
छत्तीसगढ़,,, बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को गिरफ्तार कर लिया है! यह गिरफ्तारी राज्य के राजनीति में एक बड़ा उलटफेर मानी जा रही है! क्योंकि लखमा कांग्रेस सरकार के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रहे हैं!
ईडी ने अपने बयान में बताया कि कवासी लखमा पर आरोप है! कि वे अवैध शराब बिक्री से मिलने वाली राशि में कमीशन प्राप्त करते थे! और धन शोधन में शामिल थे! एजेंसी के मुताबिक, लखमा के खिलाफ ठोस साक्ष्य मिले हैं! जो इन आरोपों को पुख्ता करते हैं! इसके तहत ईडी ने 28 दिसंबर 2024 को रायपुर, धमतरी और सुकमा जिलों में एक साथ सात स्थानों पर छापेमारी की थी! इन छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए! जो अवैध लेन-देन और ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ (पीओसी) से जुड़े थे!
ईडी के सूत्रों ने बताया कि इन दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों में शराब के कारोबार से जुड़े कई साक्ष्य मिले हैं! जो साबित करते हैं! कि लखमा ने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग किया और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए बड़े पैमाने पर धन की हेरफेर की! इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि लखमा के साथ कई अन्य लोग भी इस अवैध शराब नेटवर्क का हिस्सा थे! और इससे भारी वित्तीय लाभ कमाया जा रहा था!
यह घोटाला छत्तीसगढ़ के राज्यव्यापी शराब नीति में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को उजागर करता है! इससे पहले भी शराब घोटाले की चर्चा रही है! लेकिन इस गिरफ्तारी ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है! लखमा के खिलाफ कार्रवाई के बाद कई राजनीतिक दलों और जनता के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है! विपक्षी दलों ने इसे कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार का परिणाम बताया है! जबकि सत्ताधारी पार्टी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है!
लखमा की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ सरकार पर कई सवाल उठने लगे हैं! खासकर उन आरोपों को लेकर जो शराब के कारोबार में भ्रष्टाचार के बारे में पहले से चल रहे थे! इस घोटाले के मुख्य पहलू के रूप में राज्य सरकार द्वारा शराब बिक्री के दौरान कमीशन की व्यवस्था, भारी काले धन का लेन-देन और सरकारी नीतियों का दुरुपयोग सामने आया है!
ईडी की कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई है! और इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं! इस घोटाले में जो तथ्य सामने आए हैं! वे यह साबित करते हैं! कि शराब कारोबार में घोटाले का दायरा बहुत बड़ा हो सकता है! जो राज्य के आर्थिक और राजनीतिक ढांचे को भी प्रभावित कर सकता है!
कवासी लखमा की गिरफ्तारी के बाद इस घोटाले की जांच में नई दिशा देखने को मिल सकती है! और इसके परिणाम स्वरूप राज्य सरकार के लिए यह एक गंभीर चुनौती बन सकती है!
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